लखनऊ। राजधानी में प्रस्तावित आईटी सिटी के विकास की जिम्मेदारी किसी प्रतिष्ठित आईटी कंपनी को ही सौंपी जाएगी। सरकार ने विकासकर्ता (डवलपर) के चयन की प्रतिस्पर्धा में रियल एस्टेट डवलपर को मौका न देने का फैसला किया है।
चकगंजरिया फार्म से हाईकोर्ट का स्टे हटने के बाद आईटी डिपार्टमेंट ने आईटी सिटी को लेकर कार्यवाही तेज कर दी है। इसके लिए तैयार किए जा रहे बिड पेपर में इस बात का प्रावधान कर दिया गया है कि आईटी सिटी के डवलपर के रूप में केवल प्रतिष्ठित आईटी कंपनियां ही शामिल होंगी। प्रदेश कैबिनेट से इस बारे में विशेष अनुमति ली गई है। इसके अलावा, डवलपर के लिए कई ऐसी शर्तें जोड़ी जा रही हैं, जिनसे आईटी सिटी को लेकर देश-दुनिया की आईटी कंपनियों का आकर्षण लगातार बना रहे। इसके लिए एक शर्त यह लगाई गई है कि जो भी आईटी कंपनी आईटी सिटी के विकासकर्ता के रूप में चयनित होगी, उसे आईटी सिटी के लिए आरक्षित 100 एकड़ जमीन में से 30 एकड़ में सॉफ्टवेयर डवलपमेंट सेंटर और 10 एकड़ में स्किल डवलपमेंट सेंटर खुद बनाना होगा। यह एक मॉडल की तरह होगा। बाकी 60 एकड़ जमीन दूसरी कंपनियों के लिए रखी जाएगी। अन्य आईटी कंपनियां आकर यदि विकासकर्ता कंपनी से इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलप करने में सहयोग चाहेंगी, तो वह उसमें भी मदद करने को स्वतंत्र होंगी।
अधिसूचना की सिफारिश जल्द
आईटी सिटी को केंद्र ने स्पेशल इकोनाॅमिक जोन (सेज) घोषित किया है। सेज घोषित होने से संबंधित क्षेत्र के विकास में तमाम सहूलियतें मिल जाती हैं। आईटी विभाग के अधिकारी बताते हैं कि इससे देश-दुनिया की आईटी कंपनियों का लखनऊ की आईटी सिटी की ओर आकर्षण बढ़ गया है। चक गंजरिया क्षेत्र में 100 एकड़ जमीन आईटी सिटी के लिए है। इसके लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय से अधिसूचना जारी की जानी है। चकगंजरिया क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आवास विकास को नोडल विभाग बनाया गया है। ऐसे में वहां प्रस्तावित कार्यों के लिए किस काम के लिए कहां जमीन दिलाई जाए, यह उसे ही तय कराना है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईटी सिटी के हिस्से की 100 एकड़ जमीन का राजस्व अभिलेख मिलते ही केंद्र सरकार को अधिसूचना के लिए पत्र भेज दिया जाएगा। इसके साथ ही बिड प्रक्रिया भी शुरू करने की योजना है।