लखनऊ। केंद्रीय प्रसारण मंत्रालय ने एसटीबी को लागू कराने के लिए एमएसओ (मल्टी सिस्टम ऑपरेटर) के पेच कसे हैं। चेतावनी के बाद भी कुछ इलाकों में एनालॉग केबल प्रसारण बंद न होने पर कड़ा रूख अपनाते हुए ऐसे मामले में संबंधित एमएसओ को सीधे तौर पर जिम्मेदार मान उसका प्रसारण लाइसेंस निरस्त करने तक की चेतावनी दी गयी है। बुधवार को केंद्रीय प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई एमएसओ संचालक व मनोरंजन कर विभाग के अधिकारियों की बैठक में चारों एमएसओ को जल्दी ही उपभोक्ताओं के लिए पैकेज प्लान की दर तय करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि प्रोग्राम पैकेज प्लान की दरों का निर्धारण होने तक मासिक दो से ढाई सौ रुपये ही लिए जाएं।
एमएसओ डेन एंजवाय के उमेश्वर सिंह ने बताया कि प्रसारण मंत्रालय ने हर एमएसओ से अपने उपभोक्ताओं के यहां लगाए गए सेटटॉप बाक्स का विवरण बीस दिन में देने को कहा है। इसी के आधार पर मनोरंजन कर का निर्धारण होगा। प्रसारण मंत्रालय द्वारा अधिकृत चारों एमएसओ को ही बतौर ब्राडकॉस्टर डिजिटल केबिल प्रसारण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। इसके लिए हर एमएसओ को अपने अधीन कार्य करने वाले केबिल ऑपरेटरों पर नजर रखनी होगी।
फॉर्म न भरने पर बंद होगा प्रसारण
हर सेटटॉप बॉक्स उपभोक्ता से केबल उपभोक्ता फॉर्म भरवाना भी अनिवार्य कर दिया है। फॉर्म को भरे बिना संचालित सेटटॉप बाक्स प्रसारण को बिना चेतावनी के बंद किया जाएगा। मालूम हो कि केबिल ऑपरेटरों ने कीमत वसूल कर सेटटॉप बाक्स तो लगा दिया लेकिन फॉर्म अभी तक नहीं भरवाए हैं।
ऑपरेटरों का मासिक शुल्क भी तय
प्रसारण मंत्रालय ने सेटटॉप प्रसारण के लिए क्षेत्रीय स्तर पर संचालित केबिल ऑपरेटरों के लिए भी शुल्क राशि निर्धारित की है। इसके तहत अब प्रसारण के लिए हर केबिल ऑपरेटरों को एक कनेक्शन के एवज में संबंधित ब्राडकॉस्टर एमएसओ को मासिक तौर पर 61.80 रुपया का शुल्क देना पड़ेगा। भुगतान न करने पर उसका प्रसारण रोकने का अधिकार संबंधित एमएसओ के पास होगा।
कार्यक्रम आधारित बनेंगे पैकेज
सेटटॉप बॉक्स उपभोक्ताओं को परेशानी से बचाने के लिए कार्यक्रम के आधार पर पैकेट पैकेज बना कर किराए का निर्धारण होगा। इसके लिए उपभोक्ता को फॉर्म भरते समय पसंदीदा पे चैनलों का जिक्र भी करना अनिवार्य होगा। एक एमएसओ प्रतिनिधि ने संकेत दिए कि पैकेट पैकेज के तहत स्पोर्ट, फिल्म, बच्चों के चैनल, मनोरंजन चैनल, समाचार चैनल को अलग-अलग श्रेणी में विभाजित कर सस्ती दर पर उपभोक्ता तक पहुंचाने की कोशिश होगी।