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जयकारों से गूंजेंगे माता के दरबार

Thu, 11 Apr 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। हिंदू नव संवत्सर चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ बृहस्पतिवार से वासंतिक नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन कतारों में लगे भक्त राजधानी के तमाम देवी मंदिरों में सुबह से शाम तक मां की पूजा-अर्चना को जुटेंगे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक नवरात्र में इस बार किसी तिथि की कोई हानि न होने से लोग पूरे व्रत रख सकेंगे। डालीगंज निवासी पं. कृष्णकांत ने बताया कि बुधवार की शाम से चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा लग गई, लेकिन बृहस्पतिवार को सूर्योदय से नव संवत्सर पराभव माना जाएगा। सुबह 5:50 बजे से 7:30, 7:30 से 9:27 बजे तक कलश स्थापना का उत्तम मुहूर्त बन रहा है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त 11:35 से 12:23 बजे के बीच रहेगा। इन मुहूर्त में कलश स्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा। इस बार नवरात्र में किसी तिथि की कोई हानि नहीं है। प्रतिपदा का व्रत 11 को और अष्टमी का व्रत 18 अप्रैल को किया जाएगा। 19 अप्रैल को रामनवमी का व्रत रहेगा। उधर, नवरात्र आते ही मंदिरों में भी तैयारियां शुरू हो गई है।
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पूजन विधि
वासंतिक नवरात्र के पहले दिन पूजा स्थल को लीपने के बाद स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनानी चाहिए। वेदी में सात प्रकार के अनाज या जौ-गेहूं को बोने के बाद उसमें सामर्थ्य के अनुसार मिट्टी या धातु का कलश स्थापित करें। इसके बाद उसमें देवी प्रतिमा स्थापित करें। घट स्थापना के बाद आम के पल्लव और उनके ऊपर अनाज की कटोरी रखकर दीपक की स्थापना करें। दीपक पर चावल और अक्षत चढ़ाए। पूर्व की ओर मुख करके देशी घी या तेल का दीपक जलाएं। कलश को नैवैद्य-मिष्ठान्न का भोग लगाएं और पुष्प चढ़ाकर मां के पहले रूप की पूजा करें।

देवी पूजन
देवी भक्ति तरंगिणी और देवी पुराण के मुताबिक दक्षिण मुख की देवी का पूजन शुभ फल देने वाला और पूर्व मुख देवी का पूजन जय प्रदान करने वाला होता है जबकि पश्चिम मुख देवी का पूजन सदा स्थापन उत्तम रहता है। घट स्थापन के बाद यथाशक्ति नवाक्षर मंत्र ‘ऊं दुर्गे दुर्गे रक्षिणि स्वाहा’ का जप करना चाहिए।
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