लखनऊ। जिस देश को अंग्रेजों से लोहा लेकर आजाद कराने में हिस्सा लिया, उसी देश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। सूबे की राजधानी के जिला अस्पताल में भर्ती स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महिला को इलाज नसीब नहीं हुआ। वार्ड में कोई डॉक्टर व स्टाफ तैनात नहीं होने की वजह से महिला ने शनिवार को इलाज के अभाव में तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया। लापरवाही से गुस्साए परिवार वालों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कह कर हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल कर्मियों ने पुलिस बुलाकर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया। परिवार वालों के मुताबिक, बलरामपुर अस्पताल के वार्ड नंबर 14 में भर्ती बालागंज निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विमला देवी (77) को सांस व ह्रदय संबंधी कई बीमारियां थी। शनिवार दोपहर विमला देवी की तबियत अचानक बिगड़ गई। परिवार वालों ने ड्यूटी रूम में जाकर देखा, वहां कोई मौजूद नहीं था। परेशान परिवार वाले इमरजेंसी में पहुंचे। यहां तैनात डॉक्टर ने मरीज को देखने से मना कर दिया। परेशान तीमारदार मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए वार्ड में पहुंचे, तो विमला के शरीर में कोई प्रतिक्रिया न होने से दूसरे वार्ड की नर्स को बुला कर लाया। काफी मनुहार के बाद पहुंची नर्स ने महिला को मृत घोषित कर दिया। इस लापरवाही से नाराज परिवार वालों ने अस्पताल विरोधी नारे लगाते हुए प्रदर्शन कर दिया। उनका अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों ने साथ दिया। प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही अस्पताल के अधिकारियों ने पुलिस भेज दी, पुलिस कर्मियों ने डंडा पटकते हुए परिवार वालों को खदेड़ना शुरू कर दिया। अस्पताल व पुलिस के रवैये से आहत होकर परिवार वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का शव लेकर चले गए।
क्या इसी दिन के लिए लड़ी थी आजादी की लड़ाई ः डॉक्टरों काी संवेदनहीनता से टूटे विमला देवी के पोते दीपक कुमार दीक्षित ने रोते हुए बताया कि दादी कहा करती थी, तुम लोगों के अलावा पूरा देश मेरा परिवार है। बीमारी की हालत में बलरामपुर में भर्ती होने के समय डॉक्टर नहीं आते तो कहा करती थी कि अपने बच्चे हैं कहीं काम में होंगे आ जाएंगे। क्यों परेशान हो रहे हो। लेकिन उन्हीं बच्चों ने दादी की जान ले ली। यहीं नहीं पुलिस बुलाकर हमारे साथ बदसलूकी भी की गई।