लखनऊ। पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और एलडीए अचानक ही शहर पर मेहरबान हो गए हैं। दो महीने के भीतर करीब 350 करोड़ रुपए खर्च कर सड़कों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। हालांकि इस बात से ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वास्तविकता ये है कि साल भर में बजट के मुकाबले काम नहीं कर सकीं ये तीन प्रमुख एजेंसियां बजट लैप्स होने की आशंका और कमीशन मारे जाने के डर से ये काम करा रही हैं और इनके पास सिर्फ मार्च का ही समय बचा है। इस समय काम कराने में एलडीए सबसे आगे है, जबकि 10 महीने तक कंगाली का रोना रोने वाला नगर निगम धन मिलते ही एक अरब रुपए का काम कराने जा रहा है। सभी महकमों के अभियंता शासन की हरी झंडी मिलते ही बेतहाशा सड़कों का एस्टीमेट बनाने में लग गए हैं। हाल ये है कि कई जगह गैरजरूरी तरीकों से चौड़ीकरण व पुन: निर्माण किया जा रहा है, जबकि कुछ बदहाल सड़कों को अब भी पुरसाहाल नहीं मिल सका है। इन सारे कामों की टेंडर प्रक्रिया 31 मार्च तक फाइनल कर दी जाएगी और सड़कें आगे भी बनती रहेंगी। वर्ष 2012-13 में करीब छह महीने तक चुनावी आचार संहिता और सरकार बदलने की प्रक्रिया चलती रही। इस दौरान कोई काम नहीं हो सका। इसके बाद अधिकारियों के बदलने की प्रक्रिया की वजह से भी काम प्रभावित हुए। दिसंबर आते-आते कामों ने तेजी पकड़ी तो जनवरी से कार्यवाही आगे बढ़ी। आखिरकार फरवरी और मार्च में इतनी अधिक सड़क फाइनल की गईं, जितनी पूरे साल में नहीं हुई थीं।
नगर निगम : एक अरब का काम दो महीने में
नगर निगम ने करीब 125 करोड़ रुपए बजट में से अधिकतर काम पिछले दो-तीन महीने में करवाए हैं। अवस्थापना मद से 60 करोड़ रुपए की सड़क और समग्र विकास योजना के मद से 35 करोड़ रुपए की सड़क पिछले दो महीने में फाइनल कर दी गई है। नगर निगम की मुख्य रूप से लखनऊ पश्चिम और उत्तर विधानसभा क्षेत्रों में काम कराने की प्लानिंग की है, जिसमें पारा, जल निगम रोड, बालागंज, राजाजीपुरम आदि अन्य इलाकों में काम कराया जा रहा है।