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गाय-भैंसों के साथ कमिश्नर दफ्तर पर किसानों का डेरा

Tue, 19 Feb 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। राजधानी के दूर-दराज के गांवों से सैकड़ों किसान सोमवार को राशन-पानी व मवेशी लेकर शहर आ धमके तथा मंडलायुक्त कार्यालय गेट पर डेरा डाल दिया। जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारी रात तक मनाने में जुटे रहे लेकिन किसान नहीं माने। मवेशियों को हटाने को लेकर पुलिस की घुड़की भी बेअसर रही। कार्यालय के बाहर फुटपाथ पर खुले आसमान के नीचे बैठे किसानों ने रात का खाना भी पकाया। उनके साथ दो-तीन दर्जन महिलाएं भी धरने पर जमी थीं।
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भाकियू (टिकैत) के जिला पदाधिकारियों की रविवार को हुई बैठक में धरना-प्रदर्शन का निर्णय हुआ था। सोमवार को किसानों के मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचने से पहले ही पुलिस बल एवं दमकल के साथ जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारी मुस्तैद थे। दोपहर एक बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली व मिनी ट्रकों से किसानों का आना शुरू हुआ। उन्होंने मंडलायुक्त कार्यालय के सामने फुटपाथ पर डेरा डाल दिया। किसानों ने मिनी ट्रकों में लाए गए मवेशियों को उतारना शुरू किया तो अधिकारियों ने विरोध किया, जिस पर भाकियू नेताओं से उनकी कहासुनी भी हुई। इसके बावजूद किसानों ने कुछ छोटे मवेशी उतार लिए। बाकी को पुलिस ने ट्रक सहित यहां से दूर हटवा दिया। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी सोमवार शाम धरना पर बैठे किसानों से मिलने मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे। उन्होंने भाकियू नेताओं से किसानों की समस्याओं के बारे जानकारी की और सरकार से स्तर से उनका समाधान कराने का आश्वासन दिया। भाकियू जिलाध्यक्ष हरिनाम के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री ने किसानों के आंदोलन के समर्थन का भरोसा दिया है।

लाउडस्पीकर लगाने के लिए हुई झड़पेे
धरना स्थल पर लाउड स्पीकर लगाने को लेकर भाकियू पदाधिकारियों व पुलिस के बीच सोमवार दोपहर बाद झड़प हो गई। भाकियू नेता एक बड़ा लाउडस्पीकर लेकर आए थे। उसे लगाते देख वजीरगंज थाना प्रभारी अभिनव पुंडीर ने हस्तक्षेप किया। लाउडस्पीकर लगाने पर अड़े भाकियू के एक पदाधिकारी से कहासुनी भी हो गई। सीओ ने समझाया कि कुछ ही दूर पर उच्च न्यायालय खंडपीठ है। उसके आसपास लाउडस्पीकर बजाने पर मनाही है। इसके बाद भाकियू के वरिष्ठ नेताओं ने लाउडस्पीकर न लगाने के लिए किसानों को राजी किया।
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कई बार जाम हुआ मुख्य मार्ग का ट्रैफिक
मंडल आयुक्त कार्यालय के सामने सड़क पर दोपहर दो बजे से किसानों की भीड़ जमा हो गई। वहां से आधा किलोमीटर दूर उसी मुख्य मार्ग पर शहीद स्मारक के पास पहले से सैकड़ों लोग वजीरगंज हिंसा कांड में कार्रवाई को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसके चलते हजरतगंज से चौक जाने वाले मुख्य मार्ग पर दो-ढाई घंटे के दौरान कई बार जाम लगा। वही रोड उच्च न्यायालय व जिला सत्र न्यायालय केन्यायाधीशों के आने का रास्ता होने के कारण पुलिस पहले से सतर्क थी। काफी संख्या में पीएसी के जवान भी तैनात किए गए थे। इसके बावजूद कई बार ट्रैफिक जाम हुआ। उच्च न्यायालय मोड़ के रास्ते पर जाम लगा देख एडिशनल एसपी व स्थानीय सीओ को सड़क पर उतरना पड़ा। इस बीच अधिकारियों का कहना है कि यदि मंगलवार को और किसान जुटते हैं तो एक बार फिर यातायात को लेकर समस्या हो सकती है।

शाम तक चली पंचायत
दोपहर बाद शुरू हुई किसानों की पंचायत शाम तक चली। एडीएम सिटी ओपी पाठक, एएसपी ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी, सिटी मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र सिंह सहित पुलिस व प्रशासन के कई अधिकारियों ने किसानों को मनाने की कोशिश की। उन्हें ज्ञापन देकर धरना समाप्त करने की सलाह दी लेकिन किसानों ने यह कहते हुए वापस जाने से मना कर दिया कि उन्होंने गत माह मंडलायुक्त सहित कई अधिकारियों को समस्याओं के संबंध में ज्ञापन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। भाकियू ने सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को अपना मांगपत्र भेजा है। पंचायत के दौरान भाकियू जिलाध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा ने कहा कि किसानों की मांगों पर कार्रवाई होने तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
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