लखनऊ। नगर निगम कब्जेदारों पर मेहरबान हो गया है। उसने अपनी प्रॉपर्टी को बहुत ही सस्ते दामों में उन्हें सौंपने की तैयारी कर ली है। नगर निगम की किसी दुकान पर अगर किसी का 10 से 15 साल पुराना अवैध कब्जा है तो वह केवल 1.20 लाख रुपए खर्च कर उसका वैध मालिक हो जाएगा। अपेक्षाकृत सस्ते इलाकों के लिए यह शुल्क मात्र 60 हजार रुपए तय किया गया है। इसी तर्ज पर भवनों का म्यूटेशन (नामांतरण) केवल 40 हजार रुपए में कराया जा सकेगा। सर्वेंट क्वार्टर पर कब्जा जमाए बैठे लोग केवल 30 हजार रुपए देकर उसे अपने नाम करा सकेंगे। नगर निगम की कार्यकारिणी में यह प्रस्ताव रखने की तैयारी है। जानकार मानते हैं कि अगर यह प्रस्ताव पास हो गया तो निगम को अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा। फिलहाल इस प्रस्ताव पर दस्तख्त करने वाले पार्षद ही इसे लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
नामांतरण का नया प्रस्ताव ः नगर निगम में संपत्तियों के नामांतरण को लेकर दो श्रेणियां बनाई गईं हैं। एक तो मूल आवंटी से उसके रक्त संबंधी को आवंटन और दूसरी मूल आवंटी से अवैध कब्जेदार (जिसके लिए प्रस्ताव में ‘बाहरी व्यक्ति’ शब्द का उपयोग है) को नामांतरण। मूल आवंटी के रक्त संबंधी को म्यूटेशन में जितना शुल्क तय किया गया है, उसका ठीक दोगुना बाहरी व्यक्ति को म्यूटेशन में खर्च करना होगा।
म्यूटेशन का खर्च (रुपए में)
संपत्ति रक्त संबंधी बाहरी व्यक्ति
सर्वेंट क्वार्टर 15,000 30,000
भवन 20,000 40,000
दुकान 40,000 80,000
दुकान 60,000 1,20000
(नोट : दुकान के म्यूटेशन में 60 हजार और 1.20 लाख का खर्च हजरतगंज, लालबाग, चारबाग और अमीनाबाद की दुकानों पर लागू होगा।)
50 लाख की दुकान 1.20 लाख में ः हजरतगंज से बाराबिरवा तक डीएम सर्किल रेट करीब 40 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर है। नगर निगम में म्यूटेशन होने का मतलब है कि वह अवैध कब्जेदार दुकान का वैध मालिक हो जाएगा। ऐसे में सर्किल रेट के हिसाब से जिस 100 वर्गफीट दुकान की कीमत लगभग 50 लाख रुपए है, वह उसे मात्र 1.20 लाख रुपए में मिल जाएगी। मोहन मार्केट, नगर निगम मार्केट लालबाग, भोपाल हाउस, गड़बड़झाला, नेता सुभाष चंद्र बोस मार्केट, प्रताप मार्केट जैसी ही नगर निगम की अनेक मार्केट और हाउसिंग कॉलोनी में अवैध कब्जेदार इसी तरह से डीएम सर्किल रेट के हिसाब से अरबों रुपए में बिकने वाली संपत्ति को मात्र चंद लाख रुपए में पा लेंगे।
बनाने वाले ही हैरान ः इस प्रस्ताव को बनाने वाले ही हैरान हैं। प्रस्ताव पर साइन करने वाले नगर निगम के सबसे वरिष्ठ पार्षद यावर हुसैन रेशू और रमेश कपूर बाबा से जब इस गणित पर चर्चा की गई तो वे खुद ही दंग रह गए और दोबारा प्रस्ताव की समीक्षा करने लगे। अपर नगर आयुक्त पीके श्रीवास्तव ने कहा कि पार्षदों की कमेटी ने इस प्रस्ताव को बनाया है। इधर, महापौर डॉ. दिनेश शर्मा के मुताबिक जब यह प्रस्ताव उनके सामने आएगा, तब ही वे कुछ कह सकेंगे।
डीएम सर्किल रेट पर बढ़ेगा किराया ः नगर निगम पार्षदों की कमेटी ने डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्तियों का किराया वसूलने की सिफारिश की है। इससे यह किराया पांच से दस गुना तक बढ़ जाएगा। साथ ही कमेटी ने किराया बढ़ाने के आदेश को तीन साल दबाए रखने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की संस्तुति भी की है। नगर निगम सदन में किराए पर उठी संपत्तियों का किराया बढ़ाने और अवैध कब्जेदारों से अधिक किराया लेकर वैध करने का प्रस्ताव रेंट विभाग ने पेश किया था। महापौर ने प्रस्ताव का परीक्षण करने के लिए कमेटी बनाई। इसमें सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू व भाजपा पार्षद दल के नेता रमेश कपूर बाबा व अपर नगर आयुक्त पीके श्रीवास्तव शामिल हैं। इसी कमेटी की सोमवार को बैठक हुई थी। कमेटी ने बृहस्पतिवार को इस प्रस्ताव पर साइन कर इसे निगम सदन में रखने का फैसला किया है।