लखनऊ। इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली राज्य प्रवेश परीक्षा (एसईई) 2013 की प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। आयोजक गौतम बुद्घ प्राविधिक विश्वविद्यालय पिछले साल के प्रयोग को इस बार भी जारी रखेगा। एमसीए एवं एमबीए की आवेदन प्रक्रिया व प्रवेश परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जबकि बीटेक की प्रवेश परीक्षा ऑफलाइन ही आयोजित की जाएगी। एसईई का आयोजन इस बार 20 एवं 21 अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न शहरों में होगा। गौतम बुद्घ प्राविधिक विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. आरके खांडल की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय प्रवेश समिति (कैब) की बैठक हुई। इसमें एसईई की प्रक्रिया तय की गई। बीटेक के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों ही माध्यमों से संचालित होगी। अभ्यर्थियों की सहूलियत एवं कॉलेजों की मांग को देखते हुए इस बार एसईई के ब्रोशर डाकघरों के साथ ही कॉलेजों से भी बेचने का निर्णय लिया गया है। कॉलेजों को इसके लिए प्रस्तावित आवेदनों की मांग भेजनी होगी। आवेदन प्रक्रिया फरवरी के आखिर में शुरू होने की उम्मीद है। शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। सामान्य एवं आरक्षित संवर्ग के अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए 1000 रुपए चुकाने होंगे, जबकि एससी-एसटी अभ्यर्थियों एवं सभी संवर्ग की छात्राओं को 500 रुपए मूल्य पर आवेदन उपलब्ध होगा। एसईई के आयोजन की जिम्मेदारी पुरानी टीम को ही दी गई है। प्रतिकुलपति प्रो. वीके सिंह एसईई के समन्वयक होंगे, जबकि डॉ. मनीष गौर उपसमन्वयक एवं डॉ. शैलेन्द्र सिन्हा सह समन्वयक होंगेे। एसईई के परिणाम 30 मई के पहले घोषित किए जाएंगे और काउंसलिंग 31 जुलाई के पहले पूरी कर ली जाएगी।
20 फीसदी सीटें केंद्रीय परीक्षाओं से ः एसईई में बीटेक एवं एमबीए की 20 फीसदी सीटें इस बार भी केंद्रीय प्रवेश परीक्षाओं से ही भरी जाएंगी। बीटेक की बीस फीसदी जेईई मेन से, जबकि एमबीए की बीस फीसदी सीटें सीमैट के लिए आरक्षित रहेंगी। इसके अलावा कॉलेजों का 15 फीसदी मैनेजमेंट कोटा होगा। केंद्र सरकार एवं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के निर्देशों के अनुसार अल्पसंख्यक कॉलेजों को 50 फीसदी सीटें अपने स्तर से भरने पर भी कैब ने सहमति जता दी है। हालांकि इसके लिए उन्हें न केवल न्यूनतम अर्हता के नियमों का पालन करना होगा बल्कि एक प्रवेश परीक्षा भी आयोजित करनी होगी।
घटते दाखिले की तलाशेंगे वजह ः इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट कॉलेजों में घटते दाखिलों पर भी कैब ने चिंता जाहिर की है। पिछली बैठक के निर्देशानुसार मंगलवार को जीबीटीयू में गत तीन वर्षों में एसईई के माध्यम से हुए दाखिले के आंकड़े भी रखे गए। कैब ने एक चार सदस्यीय कमेटी गठित की है, जो प्राइवेट कॉलेजों में कम होते दाखिलों की वजह तलाशेगी। कमेटी के समन्वयक आईईटी के पूर्व निदेशक एवं राममूर्ति कॉलेज के निदेशक प्रो. अशोक खन्ना होंगे। इसके अलावा बीबीडी के निदेशक प्रो. जगवीर सिंह, आईईटी के प्रो. अरुण मित्तल एवं जीबीटीयू के अपर परीक्षा नियंत्रक डॉ. विक्रम सिंह भी कमेटी में शामिल हैं।
इंटर के बाद करिए एमबीए ः ड्यूल डिग्री कोर्स पर मुहर लगाकर कैब ने इंटर के बाद ही एमबीए करने के रास्ते खोल दिए हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने इस सत्र से समन्वित पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश जारी किए थे, जिसमें एक साथ यूजी एवं पीजी पाठ्यक्रम में दाखिला लेकर पढ़ाई की जा सके। जीबीटीयू के दो कॉलेजों जेएसएस नोएडा एवं एबीएसएस मेरठ ने मैनेजमेंट में ड्यूल डिग्री कोर्स के लिए कैब से अनुमति मांगी थी। कैब ने इन्हें मंजूरी दे दी। जीबीटीयू के रजिस्ट्रार यूएस तोमर ने बताया कि इसके जरिए छात्र छह साल की पढ़ाई पांच साल में ही पूरी कर सकेंगे। ड्यूल डिग्री में तीन वर्ष बाद यदि छात्र पढ़ाई छोड़ता है तो उसे बैचलर ऑफ मैनेजमेंट की डिग्री मिलेगी। चार साल बाद वह कोर्स से निकलता है तो उसे मास्टर इन अप्लाइड मैनेजमेंट की डिग्री मिलेगी, जबकि पांच साल पूरा कोर्स करने के बाद छात्र एमबीए की डिग्री हासिल कर सकेगा। इसके लिए भी दाखिले एसईई के जरिए ही होेेंगे। आवेदन प्रक्रिया में ड्यूल डिग्री के लिए अलग से कालम होगा। इच्छुक अभ्यर्थी इसे अपना विकल्प चुन सकेंगे।