लखनऊ। ‘अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए।’ कवि नीरज की इन पंक्तियों की तर्ज पर पुलिस, प्रशासन व धर्मगुरुओं के प्रयास का असर शनिवार को नजर आने लगा। पुराने शहर पर दहशत के बादल छंटे,ेे तनाव घटा और रौनक लौटने लगी। आम दिनों की तरह नक्खास का बाजार खुलते ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगी। तीन दिन से सुनसान पड़ी सड़कों पर वाहनों की रेलमपेल से कई बार जाम भी लगा। एहतियात के तौर पर इलाके में पुलिस, पीएसी व आरएएफ मुस्तैद रही। धर्मगुरुओं की शांति की अपील और पुलिस व प्रशासन के प्रयास से पुराने शहर का तनाव शुक्रवार शाम से घटना शुरू हुआ था। अफवाहों से खौफजदा लोगों ने शनिवार सुबह अखबार पढ़कर हालात समझे और आसपास के लोगों से गुफ्तगू के बाद काम पर निकल पड़े। व्यापारियों ने दुकानें खोलनी शुरू कीं तो तीन दिन से तनाव झेल रहे लोग खरीदारी करने निकल पड़े। काम की व्यस्तता ऐसी बढ़ी कि तनातनी को लेकर कानाफूसी की फुर्सत ही नहीं थी। गली-मोहल्लों में झुंड लगाकर दहशत का माहौल बनाने वाले लोगों के लिए जगह नहीं थी। दिन चढ़ने के साथ नक्खास व चौक बाजार में भीड़ बढ़ी तो सड़कों पर जाम लगने लगा। चौक के कमला नेहरू क्रॉस से बाजार खाला तक विभिन्न स्थानों पर पुलिस, पीएसी व आरएएफ की टीम मुस्तैद थी। नक्खास व पाटानाला चौकी पर रिजर्व फोर्स तैनात रही। खास बात यह थी कि दुकानदार और ग्राहक दोनों की नजरें आसपास के लोगों पर थीं। संदिग्ध व्यक्तियों से टोकाटाकी चलती रही। एक-दूसरे को शांति व्यवस्था के लिए समझाने का सिलसिला चलता रहा।
फसाद के आरोपियों की तलाश में लगाए भेदिए ः एसएसपी आरके चतुर्वेदी ने बताया कि पुराने शहर का तनाव काफी हद तक कम हो गया है। लोग शरारती तत्वों का मकसद समझने लगे हैं। ऐहतियात के तौर पर फोर्स तैनात है और चौकसी बरती जा रही है। फसाद के आरोपियों की तलाश में भेदिए लगाए गए हैं। वीडियो रिकॉर्डिंग व अन्य तरीकों से उनकी पहचान कराई जा रही है। प्रस्तावित जुलूस में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है।