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पद्मश्री प्रो. मेहंदी हसन का निधन

Sun, 13 Jan 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। केजीएमयू में एनॉटमी विभाग के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. मेहंदी हसन का शनिवार शाम 6 बजे संजय गांधी पीजीआई में निधन हो गया। वे 77 साल के थे। उनका इलाज क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में चल रहा था। 2012 में पद्मश्री से सम्मानित प्रो. मेहंदी देश के पहले एनॉटमिस्ट थे, जिन्हें ये सम्मान मिला था। वे जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ के डीन और प्रधानाचार्य के पद पर भी रहे। केजीएमयू में उन्होंने लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे केजीएमयू के एनॉटमी विभाग में शिक्षण कार्य करते रहे। न्यूरो एनॉटमी और न्यूरो टॉक्सिकोलॉजी के क्षेत्र में शोध के लिए प्रो. मेहंदी हसन की ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थी। प्रो. हसन का जन्म अम्बेडकर नगर के गदायां गांव में हुआ था। वे जब चार साल के थे तभी सिर से पिता का साया उठ गया। बड़े भाई ने पालन-पोषण किया। अब तक 14,600 चिकित्सकों को पढ़ा चुके प्रो. हसन के छात्रों की सूची में पद्मभूषण डॉ. नरेश त्रेहन, एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन पद्मश्री डॉ.अशोक सेठ से लेकर दो पूर्व कुलपति, विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के निदेशक, डीन शामिल हैं। वे चार इंटरनेशनल एकेडमी के फेलो, 1983 से 1985 तक डब्लूएचओ के एडवाइजर, जर्मनी, लीबिया, तेहरान, चाइना में विजिटिंग प्रोफेसर रहे। न्यूयार्क, शिकागो, हवाई, नेपल्स, इटली, लंदन, कुवैत के चिकित्सा संस्थानों में भी प्रो. हसन के व्याख्यान हुए। नेशनल एजुकेशनल पॉलिसी फॉर हेल्थ साइंसेज की ड्राफ्टिंग कमेटी और नेशनल असिसमेंट एंड एक्रिडिएशन काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य रहे।
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प्रो. हसन पर फिल्म भी बनी ः प्रो. हसन पर मलयालम में एक लघु फिल्म भी बनाई गई, जिसे केरल सरकार ने ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया था। बाद में इस फिल्म की डबिंग हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, फ्रेंच और रशियन में भी की गई। प्रो. मेहंदी हसन ने स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए अलीगढ़ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे इंडियन रेडक्रॉस कमेटी के चेयरमैन भी रहे और भोपाल गैस त्रासदी के दौरान वहां का दौराकर सहायता शिविरों का आयोजन किया। अल्पसंख्यकों को पोलियो अभियान से जोड़ने और इसकी महत्ता समझाने के लिए उन्होंने धर्म गुरुओं के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1988 में एम्स द्वारा आयोजित पहली एफ्रो एशियन ओशियाना कांग्रेस एनॉटमिस्ट के अध्यक्ष, 1986 में इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोसाइंसेज और 1992 एसोसिएशन ऑफ जेरोंटोलॉजी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रहे।
प्रोफाइल- प्रो. मेहंदी हसन
जन्म : 21 मार्च 1936, गदायां गांव, जिला अम्बेडकर नगर
निधन: 12 जनवरी 2013 लखनऊ
पिता : स्व. जव्वाद हुसैन
शिक्षा : एमबीबीएस, एमएस, पीएचडी फोरेंसिक मेडिसिन, डीएससी मेडिसिन
रिसर्च : मस्तिष्क में जिंक की उपस्थिति, बुढ़ापे के जिम्मेदार पिगमेंट की हाइपोथिसिस
करियर : जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, एएमयू अलीगढ़, 20 से अधिक देशों में विजिटिंग प्रोफेसर, वर्तमान में सीएसएमएमयू में एमेरिट्स प्रोफेसर
रिसर्च पेपर : 125 रिसर्च पेपर, 660 साइटेशन, 38 किताबें
पुस्तकें : पांच किताबें प्रकाशित, आठ किताबों में विभिन्न अध्याय
उपलब्धियां : इंटरडिसिप्लनरी ब्रेन रिसर्च सेंटर जेएनएमसी, एएमयू अलीगढ़, इंडियन ऐकेडमी ऑफ न्यूरोसाइंसेज में योगदान दिया। भारत के पहले एनॉटमिस्ट, जिन्होंने एनॉटमी में एमएस ऑनर्स के साथ किया। पीएचडी और डीएससी करने वाले पहले एनॉटमिस्ट। इनके नाम से एनॉटमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने गोल्ड मेडल शुरू किया।
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पुरस्कार : हरीओम आश्रम एलेम्बिक अवार्ड और डॉ. बीसी राय अवार्ड पाने वाले पहले एनॉटमिस्ट
चिकित्सा जगत की अपूरणीय क्षति ः प्रो. मेहंदी हसन के निधन पर उनके छात्र रहे पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के हेड और आईएमएम के उपाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत ने इसे चिकित्सा जगत की अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि सादगी से जीवन जीते हुए ऊंचाइयों तक कैसे पहुंचा जाए, इसकी मिसाल प्रो. मेहंदी हसन थे। वे शिक्षकों लिए रोल मॉडल थे। नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बावजूद उन्होंने शिक्षण कार्य से दूरी नहीं बनाई और नि:शुल्क केजीएमयू के एनॉटमी विभाग में पढ़ाते रहे। केजीएमयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. एके वैश्य, डॉ. संजय खत्री, डॉ. संतोष कुमार आदि ने भी उनकी मौत को चिकित्सा जगत की गहरी क्षति बताया। लखनऊ एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. पीके गुप्ता ने भी उनके आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया है।
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