लखनऊ। बिना रिफंड दिए ही आवास विकास परिषद आवेदकों से रिफंड मिलने को लेकर पहले ही दस्तखत करवा रही है। इससे मकान आवंटन के लिए पंजीकरण कराने वाले हजारों आवेदकों की पंजीकरण राशि पर संकट के बादल छा सकते हैं। मसलन परिषद की गलती या लापरवाही से किसी आवेदक की पंजीकरण राशि उस तक नहीं पहुंचती है तो वह आवास विकास परिषद पर उसको वापस पाने केलिए कानूनी तौर पर दबाव नहीं बना सकेगा। ऐसे में उसे अपनी गाढ़ी कमाई से हाथ धोना पड़ सकता है।
एक अदद छत पाने के लिए लोग इन दिनों आवास विकास की वृंदावन व आम्रपाली योजना में पंजीकरण फार्म भर रहे हैं। पंजीकरण के लिए परिषद आवेदक से पांच से दस प्रतिशत तक पंजीकरण राशि जमा करा रही है। पंजीकरण फार्म जमा करने के साथ ही परिषद आवेदक से रिफंड वाउचर पर हस्ताक्षर भी करवा ले रही है कि आवेदक को रिफंड मिल गया है। हद तो यह है कि आवेदक से ही किसी राजपत्रित अधिकारी से यह प्रमाणित कराने को कहा गया है कि भुगतान प्राप्त करने वाले का नाम व पता सही है। यानी बिना रिफंड मिले ही आवेदक से रिफंड मिल गया का शपथ पत्र लिया जा रहा है। हस्ताक्षर भी रसीदी टिकट पर कराए जा रहे हैं। खासबात यह है कि बिना रिफंड मिले ही रिफंड वाउचर पर हस्ताक्षर करने से आवेदकों को भले ही उतनी परेशानी न हो रही है जितनी परेशानी इसका सत्यापन कराने में हो रही है।
वृंदावन कॉलोनी में मकान के लिए आवेदन करने वाले अलीगंज सेक्टर आई निवासी रमाशंकर सिंह ने बताया कि कोई राजपत्रित अधिकारी यह सत्यापति करने के लिए तैयार ही नहीं होता है कि वह किसी व्यक्ति के उस भुगतान को सत्यापित करे जो मिला ही नहीं है। यह तो एक तरह का फ्रॉड है। इंदिरा नगर डी ब्लाक निवासी जितेश सिंह ने कहा कि वह अपने परिचित अधिकारी के पास रिफंड वाउचर सत्यापित कराने के लिए गए मगर उन्होंने साफ मना कर दिया, कहा पैसे का मामला है वह कैसे सत्यापति कर दें। यदि रिफंड मिल गया होता तो उनको सत्यापित करने में कोई परेशानी नहीं होती। वहीं तमाम आवेदक रिफंड वाउचर को सत्यापित कराने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। अलीगंज सेक्टर बी निवासी हरेंद्र सिंह ने कहा कि रिफंड वाउचर को बिना सत्यापित कराए बैंक में जमा करने गया था मगर जमा नहीं हो पाया। बैंक ने लौटा दिया। पिछले तीन दिनों से सत्यापित कराने के लिए परेशान हूं।
लापरवाही और धांधली छुपाने केलिए बनाए गए ऐसे नियम ः आवास विकास परिषद के ही कुछ अधिकारी इसपर दबी जुबान में सवाल उठाते हैं। उनका कहना है कि कुछ अफसरों ने अपना काम हल्का करने के लिए ऐसे नियम बनाए हैं। इससे उनकी लापरवाही पर तो पर्दा पड़ा ही रहेगा साथ ही पंजीकरण राशि लौटाने में वह गड़बड़ी भी आसानी से कर सकें गे और पकड़े भी नहीं जाएंगे। इसलिए आवेदन के समय ही रिफंड वाउचर पर हस्तारक्षर कराकर जमा कराया जाता है, ताकि किसी का रिफंड पहुंचे या न पहुंचे, उससे उन पर कोई फर्क न पड़े।
एलडीए में नहीं है ऐसा सिस्टम ः रिफंड का जो सिस्टम आवास विकास परिषद में है वह एलडीए में नहीं है। एलडीए में पंजीकरण फार्म के साथ आवेदक से ऐसा कोई फार्म नहीं भरवाया जाता जिसमें बिना रिफंड दिए ही आवेदक से उसके मिल जाने का प्रमाण लिया जाता हो। जिस तरह आवास विकास परिषद आवंटन न होने पर चेक या सीधे बैंक खाते में पंजीकरण राशि वापस भेजती है उसी तरह एलडीए भी। लेकिन एलडीए आवास विकास की तरह बिना रिफंड किए ही रिफंड मिल गया का वाउचर नहीं भरवाती और न ही सत्यापित कराती है।
आगे से नहीं होगा ऐसा नियम ः ऐसे नियम अगली बार नहीं होंगे। यह व्यवस्था समाप्त की जाएगी। मेरे आने से पहले से यह सिस्टम चल रहा था। बाद में रिफंड के लिए औपचारिकता न पूरी करनी पड़ी इसके लिए हो सकता है कि पहले से ही रिफंड वाउचर हस्ताक्षर कराकर जमा कराया जाता है। यदि किसी को सत्यापन में परेशानी हो रही है तो वह बिना सत्यापन ही अपना पंजीकरण फार्म जमा कर सकता है। इस संबंध में बैंकों को तत्काल निर्देश जारी किए जाएंगे।
जेबी सिंह, संयुक्त आवास आयुक्त