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अखिलेश की टीम में 12 नए चेहरे

Thu, 07 Feb 2013 08:51 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 11 महीने पुराने मंत्रिपरिषद के पहले विस्तार में बृहस्पतिवार को 12 नए चेहरों को शामिल किया है। गोंडा में सीएमओ के अपहरण व मारपीट के आरोपी विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह की मंत्रिपरिषद में वापसी हो गई।
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सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के वफादार और पार्टी प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे राजेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि गाजीपुर के युवा विधायक विजय कुमार मिश्र राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए हैं।

बृहस्पतिवार दोपहर राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल बीएल जोशी ने मंत्रियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव समेत कई मंत्री मौजूद थे। विस्तार में अल्पसंख्यक वर्ग को नुमाइंदगी नहीं मिल पाई न ही महिला प्रतिनिधित्व एक से आगे बढ़ सका। हालांकि युवाओं की भागीदारी बढ़ी है, जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की भी कोशिश की गई है।
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बजट सत्र से ठीक सप्ताह भर पहले हुए इस विस्तार की भूमिका करीब एक पखवाड़े से बन रही थी। अखिलेश यादव की बुधवार को राज्यपाल से हुई मुलाकात के बाद से मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हो गईं और बृहस्पतिवार सुबह तब सस्पेंस खत्म हो गया जब राजभवन व सरकार की तरफ से शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रण पत्र भिजवाए जाने लगे। राज्यपाल ने सबसे पहले राजेंद्र चौधरी को काबीना मंत्री की शपथ दिलाई। फिर विजय मिश्र ने शपथ ग्रहण ली। इसके बाद बारी-बारी से सभी राज्यमंत्रियों को शपथ दिलाई गई। 20 मिनट में समारोह पूरा हो गया।

एक नजर: नए मंत्री
कैबिनेट मंत्री : राजेंद्र चौधरी                 
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार): विजय कुमार मिश्र            
राज्यमंत्री: विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह, राममूर्ति सिंह वर्मा, विजय बहादुर पाल, आलोक शाक्य, रामसकल गुर्जर, मनोज कुमार पाण्डेय,  गायत्री प्रसाद प्रजापति, नितिन अग्रवाल, तेज नारायण उर्फ पवन पांडेय, योगेश प्रताप सिंह उर्फ योगेश भैया

सरकार नहीं उत्तर प्रदेश राज्य के राज्यमंत्री!
राज्यमंत्री के रूप में शपथ लेते समय राम सकल गुर्जर ने जैसे ही उ.प्र. सरकार के राज्यमंत्री का उच्चारण किया, राज्यपाल उन्हें टोकते हुए कहा कि सरकार नहीं उ.प्र. राज्य के राज्यमंत्री कहें। इसके बाद राम सकल ने सही उच्चारण करते हुए शपथ ली।

अब 20 कैबिनेट और पांच स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री
विस्तार के बाद अखिलेश मंत्रिपरिषद में कैबिनेट मंत्रियों की संख्या 20 हो गई है जबकि स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों की संख्या पांच है। साथ ही राज्यमंत्री भी 33 हो गए हैं।

पहली बार विधायक और मंत्री भी
विजय मिश्रा, राम सकल गुर्जर, मनोज कुमार पांडेय, नितिन अग्रवाल, गायत्री प्रजापति, पवन पांडेय, विजय बहादुर पाल को पहली बार विधायक बनने के साथ ही मंत्री बनने का मौका मिला है।

विधायक रहे लेकिन मंत्री पहली बार
राजेंद्र चौधरी, आलोक शाक्य पहले भी विधायक रह चुके हैं, पर मंत्रिपरिषद में पहली बार शामिल किए गए हैं।

फिर बने मंत्री
योगेश प्रताप सिंह, पंडित सिंह व राम मूर्ति वर्मा को दूसरी दफा मंत्रिपरिषद में शामिल होने का मौका मिला है।

जातीय-क्षेत्रीय संतुलन पर ध्यान
मंत्रि परिषद के पहले विस्तार में सपा ने जातीय संतुलन साधने की कोशिश की है। आज जिन मंत्रियों को शपथ दिलाई उनमें तीन ब्राह्मण, दो ठाकुर, एक जाट, एक गुर्जर, एक वैश्य और चार अति पिछड़े हैं। साथ ही विस्तार में पूर्वी और पश्चिम यूपी का संतुलन साधने की भी कोशिश नजर आती है।

अल्पसंख्यक को नहीं मिली जगह
विस्तार में किसी अल्पसंख्यक को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि मंत्रिपरिषद में पहले से ही 10 अल्पसंख्यक वर्ग के मंत्री हैं।

महिलाओं की उपेक्षा
अखिलेश सरकार में महिला प्रतिनिधित्व के नाम पर इकलौती राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुणा कुमारी कोरी हैं। मंत्रिपरिषद के इस विस्तार में भी मुख्यमंत्री ने किसी महिला को टीम में शामिल नहीं किया।

दो जगह अभी भी खाली
संवैधानिक प्रावधान के मुताबिक, प्रदेश में मंत्रिपरिषद का आकार 60 सदस्यीय हो सकता है। विस्तार के बाद मंत्रियों की तादाद 58 हो गई है। ऐसे में अभी दो और मंत्रियों की गुंजाइश है।

यूथ ब्रिगेड मजबूत करने की मंशा
अखिलेश ने मंत्रिमंडल विस्तार में यूथ ब्रिगेड को मजबूत करने की मंशा दिखाई है। मनोज पांडेय, पवन पांडेय, नितिन अग्रवाल, विजय मिश्रा जैसे युवा चेहरों को मंत्रिपरिषद में जगह मिली है।

मुकदमों में पवन आगे
शपथ लेने वाले नए मंत्रियों में सबसे ज्यादा आठ आपराधिक मामले पवन पांडेय पर दर्ज हैं। पवन पांडेय पर हत्या के प्रयास का एक, मनोज पांडेय पर अपहरण और पंडित सिंह पर गैर इरादतन हत्या जैसे गंभीर आरोप हैं। राजेंद्र चौधरी व विजय मिश्रा के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है।

नए मंत्रियों की हैसियत
सबसे धनवान : नितिन अग्रवाल -7.85 करोड़ रुपये
सबसे कमजोर : पवन पांडेय - 66 हजार    

पंडित सिंह ‘रिटर्न’....
गोंडा के दबंग विधायक और सीएमओ के अपहरण व मारपीट के आरोपी पंडित सिंह की मंत्रिपरिषद में वापसी चौंकाने वाली रही है। सीएमओ के  अपहरण के मामले के तूल पकड़ने के बाद पंडित सिंह से मुख्यमंत्री ने इस्तीफा ले लिया था। मुलायम के करीबी माने जाने वाले पंडित सिंह के मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। शपथ ग्रहण के बाद पत्रकारों के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित सिंह के मामले में जांच रिपोर्ट मिल गई है। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अभी रिपोर्ट पढ़ी नहीं है। पढ़ने के बाद जो निष्कर्ष होगा, बता देंगे।

मजबूरियों का विस्तार
अखिलेश मंत्रिपरिषद के पहले विस्तार में साल भर की सरकार के सबक नजर आते हैं न सरोकार। विशुद्ध चुनावी नजरिये से हुआ यह विस्तार अपने घर को दुरुस्त करने की कवायद भर है। इसमें किसी को तुष्ट करने की कोशिश है, तो कहीं संतुष्ट करने की। सियासत के जातीय-अभयारण्य यूपी की कड़वी हकीकत है। यह विस्तार किसी-न-किसी रूप में उसे ही साधता नजर आता है। ऐसा न होता, तो बतौर पदोन्नति या पदावनति, सरकार के किसी मंत्री के काम का आकलन भी विस्तार की कसौटी बनता।

यही नहीं, नए मंत्रियों में राजेंद्र चौधरी तक को मुलायम सिंह यादव की वफादारी का इनाम इसलिए मिल पाया कि वह जाट हैं और मंत्रियों की पूरी फौज में प्रदेश की इस ताकतवर जाति की कोई नुमाइंदगी नहीं थी। कुछ ऐसा ही एक और बड़ी जाति गुर्जर को लेकर है। चूंकि विधानसभा चुनाव में सपा के सभी गुर्जर उम्मीदवार हार गए थे तो राम सकल को गुर्जर होने के नाते पहले विधानपरिषद का टिकट मिला, अब मंत्री पद।

छवि नहीं, सियासती गणित
पंडित सिंह जैसे चेहरे की वापसी से साफ है कि सरकार अपनी छवि को लेकर ज्यादा चिंतित नही है। सियासत में पंडित सिंह जैसा खलनायकत्व, हीरो ही बनाता है। सपा को लगता है कि उसका मिशन-2014 जातीय-ध्रुवीकरण से ही सध जाएगा। यादव-मुसलमान के साथ, प्रमोशन में आरक्षण के विरोध के चलते ऊंची जातियों की गोलबंदी सपा अपने खाते में मान रही है। तीन ब्राह्मण, दो राजपूत व एक वैश्य के साथ जाट-गुर्जर की नुमाइंदगी से यही निशाना साधने की कोशिश है। वहीं, पिछड़े वर्ग में अति-पिछड़ों और गैर यादवों का प्रतिनिधित्व यादववाद के आरोपों को कुछ हल्का करेगा।

निगाहें कहीं, निशाना कहीं और
रायबरेली में सोनिया गांधी के सामने लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार खड़ा नहीं कर सपा वॉकओवर देती रही है, इस बार भी उसने ऐलान कर दिया है। देर-सबेर राहुल गांधी को भी अमेठी में यह सहूलियत मिलनी है लेकिन अमेठी से गायत्री प्रसाद प्रजापति और रायबरेली से मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर मुलायम ने वहां सपा को सन्निपात में जाने से बचाया है। गोंडा से पंडित सिंह की बहाली ही नहीं हुई, योगेश प्रतापसिंह को भी लालबत्ती दे दी गई।

कृषि मंत्री आनंद सिंह वहां से पहले ही मंत्री हैं। विकास की दौड़ में खासे पिछड़े इस छोटे से जिले पर मुलायम की मेहरबानी का राज केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा हैं। सोनिया-राहुल की तरह वे अपने पुराने दोस्त बेनीप्रसाद को बख्शने के मूड में नहीं हैं। बेनी बाराबंकी लौट नहीं सकते, ऐसे में यह चक्रव्यूह उन्हें महंगा पड़ सकता है। राममंदिर पर लौट रही भाजपा को चिढ़ाने के लिए मुलायम ने अयोध्या के विधायक रहे लल्लू सिंह को हराने वाले सियासत के नवजात तेज नारायण उर्फ पवन पांडेय को लालबत्ती थमा दी।

सिर्फ मुलायम की चली
विस्तार की पूरी चौसर मुलायम ने बिछाई, चालें भी उन्होंने अकेले ही चलीं। लक्ष्य उनका 2014 का लोकसभा चुनाव है, उसके लिए वे सभी कील-कांटे दुरुस्त कर लेना चाहते हैं। जो कमी रह गई, उसके लिए जल्द ही निगमों-बोर्डों में नियुक्तियों की नई खेप का इंतजार कीजिए।
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