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Interesting Fact: क्यों 10 अंकों का ही होता है मोबाइल नंबर? जानिए इसके पीछे की वजह

Tue, 24 Sep 2024 11:00 AM IST
शिखर बरनवाल यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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10 अकों के ही क्यों होते हैं मोबाइल नंबर - फोटो : Amar Ujala
Reason Behind 10 Digit Mobile Number: क्या आपने कभी सोचा है कि मोबाइल नंबर सिर्फ 10 अंकों का ही क्यों होता है? भारत में मोबाइल नंबरों के 10 अंकों का होना कोई संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक व्यवस्थित योजना है। जी हां, हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय नंबरिंग योजना (एनएनपी) 2003 की। इस योजना के तहत देश के सभी टेलीकॉम नेटवर्क के लिए एक ही मानक तय है कि सभी मोबाइल नंबर 10 अंकों के ही होंगे।

एक और रोचक तथ्य है, जिसके बारे में हम आपको बताते हैं। आपने देखा होगा कि पुराने नंबरों की शुरुआती संख्या 9 होती थी। इसके कुछ सालों बाद 8 से होने लगी और कुछ साल बीतने के बाद अब मोबाइल नंबरों की शुरुआत 6 से भी होने लगी है। इसके पीछे की वजह यह है कि 10 अंकों के नंबर में किसी एक अंक से शुरू होने वाले नंबरों की संख्या सीमित होती है और जब उस अंक के सभी नंबर खत्म हो जाते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियां नंबरों की शुरुआत की संख्या बदल देती हैं।
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डायल कीपैड - फोटो : freepik
इसका बड़ा उदाहरण यह है कि कंपनियां अब 9 की जगह मोबाइल नंबर की शुरुआत 6 से करने लगी हैं और भविष्य में नंबरों की शुरुआत 5 और 4 से भी की जा सकती है। आइए जानते हैं कि आखिर मोबाइल नंबर की संख्या 10 क्यों होती है?

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मोबाइल पर बात करना - फोटो : freepik
क्या है नंबरों की संख्या 10 होने के पीछे की वजह?
  • 10 अंकों के नंबर होने से देश में बहुत बड़ी संख्या में मोबाइल नंबर जारी किए जा सकते हैं। इससे देश की बढ़ती जनसंख्या की मोबाइल सेवाओं की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है।
  • भारत में मोबाइल नेटवर्क का जब विस्तार हो रहा था, तब यह तय करना जरूरी था कि सभी नंबर यूनिक हों और जिससे नेटवर्क एक-दूसरे के साथ आसानी से जुड़ सकें। 10 अंकों के नंबरों से यह सुनिश्चित हो गया कि सभी नेटवर्क एक ही नंबरिंग सिस्टम का पालन करें।
  • भारत की राष्ट्रीय नंबरिंग योजना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया गया है। इससे भारत के मोबाइल नेटवर्क को दुनिया के अन्य देशों के नेटवर्क से जोड़ने में आसानी हुई है।

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नंबर डायलिंग - फोटो : freepik
नंबरिंग योजना का इतिहास
जब भारत में मोबाइल सेवाओं की शुरुआत हुई थी, तब नंबरों की संख्या कम थी और नंबर छोटे होते थे। लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए दूरसंचार विभाग ने एक राष्ट्रीय नंबरिंग योजना शुरू की, जिसके तहत सभी मोबाइल नंबरों को 10 अंकों का बनाया गया।
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डायल की-पैड - फोटो : freepik
प्रत्येक टेलीकॉम ऑपरेटर को एक अलग कोड दिया गया, जिससे नंबरों को अलग-अलग नेटवर्क से जोड़ा जा सके। इसके कारण ही भारत में मोबाइल नंबर 10 अंक के होते हैं। इसने देश में मोबाइल सेवाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हमें एक व्यवस्थित और कुशल टेलीकॉम नेटवर्क प्रदान किया है। हालांकि, नवीन राष्ट्रीय नंबरिंग योजना 2020 के मुताबिक 10 अंकों के नंबर को बढ़ा कर 11 नंबर का किया जा सकता है।
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