चुनौतियों का विशाल पहाड़ था पहले वित्तमंत्री के समक्ष
भारत को जब अगस्त 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी तो वह कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था, जिसमें विभाजन के बाद शरणार्थियों के पुनर्वास और पाकिस्तान के साथ परिसंपत्तियों और देन दारियों का विभाजन जैसे मुद्दे शामिल थे। बावजूद आर्थिक मुश्किलों के उस समय की सरकार ने देश की सुरक्षा का सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुये बजट का लगभग 20 प्रतिश महत्वपूर्ण हिस्सा रक्षा के लिए आवंटित किया था, जो विभाजन के बाद भारत की सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है। पहले बजट में भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि और ग्रामीण विकास के महत्व को समझते हये इन क्षेत्रों पर जोर दिया गया। बजट में औद्योगिक वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कराधान नीति प्रस्तावित की गई, जिसमें निवेश को प्रोत्साहित करने के उपाय भी शामिल थे।
तब और अब के बजटों में जमीन आसमान का अंतर
भारत के पहले और नवीनतम केंद्रीय बजटों के बीच अंतर स्वतंत्रता के बाद के दशकों में भारत की अर्थव्यवस्था, शासन प्राथमिकताओं और सामाजिक लक्ष्यों के परिवर्तन को रेखांकित करता है। यह विकास भारत की एक नव स्वतंत्र राष्ट्र से पुनर्निर्माण चुनौतियों का सामना करने से लेकर 21वीं सदी में समावेशी और सतत विकास के लिए प्रयास करने वाले वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने तक की यात्रा को दर्शाता है।
स्वतंत्र भारत के पहले केंद्रीय बजट (1947) और नवीनतम केंद्रीय बजट (उदाहरण के लिए, 2024 का केंद्रीय बजट) के बीच अंतर और परिवर्तन काफी महत्वपूर्ण हैं और सात दशकों से अधिक समय में भारत की अर्थव्यवस्था, शासन और प्राथमिकताओं के विकास को दर्शाते हैं। पहला बजट (1947) कुल व्यय 1,713 करोड़ रुपये था, जो स्वतंत्रता के बाद भारत की अर्थव्यवस्था के शुरुआती चरण को दर्शाता है। जबकि नवीनतम 2024-25 का बजट आकार 47,65, 768 करोड़ रुपये था।
वित्तमंत्री सीतारमण के 7वें बजट आकार में काफी वृद्धि होने की आशा है। पहला बजट में पुनर्निर्माण, स्थिरता और विभाजन की तत्काल चुनौतियों के प्रबंधन पर जोर दिया गया था। आज सतत विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे में निवेश और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर ध्यान केंद्रित है। पहले बजट में आर्थिक विकास को गति अब जनसांख्यिकी और आर्थिक गतिशीलता में बदलाव के कारण स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल बुनियादी ढाँचा और स्टार्टअप जैसे विविध क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण ध्यान दिया जा रहा है।
राष्ट्र निर्माण की बुनियाद में पहला बजट
पहले बजट में आरंभिक कराधान नीतियां राजस्व आधार स्थापित करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई थीं। अब जीएसटी कार्यान्वयन सहित आधुनिक कराधान सुधार, कर प्रशासन में सरलीकरण, पारदर्शिता और दक्षता पर ध्यान केंद्रित करते हैं। पहला बजट मुख्य रूप से राष्ट्र निर्माण और स्वतंत्रता के तुरंत बाद की चुनौतियों के प्रबंधन पर केंद्रित था। अब के बजटों में विदेशी निवेश को आकर्षित करने और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों को बढ़ाने के उपायों के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के एकीकरण को तेजी से दर्शाया गया है। पहले बजट के दौर की सीमाओं के कारण तकनीक पर कम ध्यान दिया गया। लेकिन अब आर्थिक विकास और दक्षता के चालक के रूप में डिजिटल बुनियादी ढांचे, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया जाता है।