इस अध्ययन को चार खास तरह के प्रदूषक तत्व PM₁₀, PM₂.₅, SO₂, और NOₓ को ध्यान में रखकर किया गया। अध्ययन में 2019 को आधार वर्ष बनाकर यह पता करने की कोशिश की गई कि साल 2030 तक ये प्रदूषक तत्व कितने कम और ज्यादा हो सकते हैं। इस अध्ययन में जो निष्कर्ष निकले हैं उन्हें 70 प्रतिशत से अधिक शहरों में किए गए परिवहन और घरेलू ईंधन खपत सर्वेक्षणों के विरुद्ध सत्यापित किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि इन शहरों में अगर वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कोई ठीक योजना नहीं बनाई जाती है। इस स्थिति में PM2.5 जो कि काफी हानिकारक वायु प्रदूषक है उसकी मात्रा में साल 2030 तक वृद्धि देखने को मिल सकती है।
इसके अलावा स्टडी में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्टेशन, कंस्ट्रक्शन और खुले में जलने वाले अपशिष्ट पदार्थ पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि NCAP के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके।
बेंगलुरु में CSTEP द्वारा आयोजित Indian Clean Air Summit 2024 के छठे संस्करण में इस अध्ययन में जो निष्कर्ष निकले हैं उसको लेकर एक विजुअलाइजेशन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा।