कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए हमें क्षेत्रीय दिशा में भी ध्यान देने की जरूरत है। इससे वातावरण को प्रदूषित करने वाले अदृष्य प्रदूषक तत्व जैसे ब्लैक कार्बन आदि को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सतर्कता, योजनाबद्ध और सामांजस्य के साथ किए गए प्रयास से प्रदूषण को तेजी से नियंत्रित किया जा सकता है।
Indian Clean Air Summit 2024
- फोटो : CSTEP
इसके अलावा कार्यक्रम में अनुमिता रॉय चौधरी (Executive Director, Research and Advocacy, Centre for Science and Environment) ने ब्लैक कार्बन से पर्यावरण को होने वाले खतरों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विज्ञान हमें बता रहा है कि पार्टिकुलेट मेटर के कुछ टाइप जैसे की ब्लैक कार्बन के अंदर Co2 से ज्यादा वातावरण को गर्म करने की क्षमता है। ब्लैक कार्बन प्राकृतिक रूप से बादल बनने की प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। इसका असर बारिश के पैटर्न पर भी देखने को मिल रहा है।
फॉसिल फ्यूल, बायोमास और कूड़ा कचरे को जलाने की वजह से ब्लैक कार्बन का उत्सर्जन होता है। ब्लैक कार्बन का स्वास्थ्य, वातावरण और हमारी प्रकृति के ऊपर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। CSTEP ने क्लीन एयर साइंस के साथ सहभागिता बनाकर COP28 का जब आयोजन हुआ था उस समय एक पॉलिसी ब्रीफ लॉन्च किया था। इसका शीर्षक ‘The Case for Action on Black Carbon’ था।
Indian Clean Air Summit 2024
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कार्यक्रम में अनुमिता ने बताया कि ब्लैक कार्बन पार्टिकुलेट मैटर का एक टाइप है। इस कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन या किसी और संस्था के पास ब्लैक कार्बन को लेकर मॉनिटरिंग स्ट्रैटजी नहीं है। कार्यक्रम में आरती खोसला , (संस्थापक और निदेशक, क्लाइमेट ट्रेंड्स) ने हवा की गुणवत्ता और क्लाइमेट गोल कैसे एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं उस पर कई महत्वपूर्ण जानकारी दी।