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एशिया कप 2022: श्रीलंकाई खिलाड़ियों से सीखो जीरो से हीरो कैसे बना जाता है?

सार

देखा जाए तो एशिया कप की शुरुआत श्रीलंका के लिए बहुत अच्छी नहीं रही। पहला मैच श्रीलंका अफगानिस्तान से आठ विकेट से बुरी तरह पराजित हुई। सभी क्रिकेट विशेषज्ञ इस बात पर एकमत थे कि श्रीलंका की एशिया कप जीतने की संभावना शून्य है।
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एशिया कप 2022 श्रीलंका की टीम ने जीता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंद रोज पहले श्रीलंका की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ा हुआ था। सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे। आक्रोशित जनता ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया था। देश के प्रधानमंत्री को कुर्सी छोड़नी पड़ी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, दोनों देश छोड़कर भाग गए। देश भयंकर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। कीमतें आसमान छू रही हैं। जो हालात श्रीलंका में बने हुए हैं।

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उनमें शायद यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि देश में भारी संकट के बावजूद श्रीलंकाई टीम पूरे हौसले से खेलेगी और एशिया की सिरमौर बनेगी। श्रीलंका का एशिया कप जीतना देश के क्रिकेट प्रेमियों के लिए हवा का ठंडा झोंका है।

 


हार से जीत तक का सफर

देखा जाए तो एशिया कप की शुरुआत श्रीलंका के लिए बहुत अच्छी नहीं रही। पहला मैच श्रीलंका अफगानिस्तान से आठ विकेट से बुरी तरह पराजित हुई। सभी क्रिकेट विशेषज्ञ इस बात पर एकमत थे कि श्रीलंका की एशिया कप जीतने की संभावना शून्य है। अफगानिस्तान से करारी हार को श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने सबक और हौसला बढ़ाने का एक जरिया बनाया। पहले मैच के बाद जो कमबैक श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने किया, वह काबिले तारीफ है। टीम ने बाकी सभी पांचों मैच जीते।

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श्रीलंकाई कप्तान शनाका एक नायक और विजेता बनकर उभरे। खास बात यह है कि उनकी कप्तानी में टीम पाकिस्तान के खिलाफ टी-20 में आज तक कोई मुकाबला नहीं हारी है। एशिया कप फाइनल के हीरो भानुका राजपक्षे श्रीलंका की ओर से टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी भी रहे। उन्होंने 191 रन बनाए।

महत्वपूर्ण 71 रन

पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में राजपक्षे ने 71 रनों की नाबाद पारी खेली। करीब-करीब पाकिस्तान के जबड़े में जा चुके मैच को वो बाहर खींच लाए। जिस समय श्रीलंकाई टीम के पांच विकेट गिर गए थे और टीम के मात्र 58 रन बने थे, तब यूं प्रतीत होने लगा था कि पाकिस्तान पूरी श्रीलंका टीम को 100 रन के भीतर समेट देगा। राजपक्षे ने वानिंदु हसरंगा के साथ 58 रनों की महत्वपूर्ण पार्टनरशिप कर टीम को सम्मानजनक 170 रन के स्कोर तक पहुंचाया। जहां से टीम लड़ सकती थी।

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भारतीय खिलाड़ियों को श्रीलंकाई खिलाड़ियों से सीखने और सबक लेने की जरूरत है - फोटो : अमर उजाला
पूरे टूर्नामेंट में अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबला छोड़ दिया जाए तो श्रीलंकाई गेंदबाजों ने जोरदार प्रदर्शन किया। वानिंदु हसरंगा छह मैचों में 9 विकेट लेकर श्रीलंका की ओर से सर्वाधिक सफल गेंदबाज रहे। फाइनल मुकाबले में भी हसरंगा ने तीन अहम पाकिस्तानी बल्लेबाजों को आउट करके टीम के लिए कप सुनिश्चित किया। उन्होंने पाकिस्तानी बैटिंग की रीढ़ रिजवान, खुशदिल और आसिफ को आउट करके मैच का रुख ही बदल दिया। बल्ले से भी हसरंगा ने 36 रन बनाए।
 
क्रिकेट प्रेमियों को 1996 का वर्ल्ड कप याद होगा। श्रीलंका के कुछ ऐसे ही हालात थे, जैसे इस बार एशिया कप में थे। 1996 के वर्ल्ड कप से पहले यदि किसी से पूछा जाता कि टूर्नामेंट कौन जीतेगा? तो वह ऑस्ट्रेलिया, इंडिया, पाकिस्तान, वेस्ट इंडिज या इंग्लैंड जैसी बड़ी टीमों के नाम लेता। श्रीलंका की गिनती उस वक्त निचले क्रम की टीमों में होती थी। 
 


श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने पलटी बाजी

जिंबाब्वे और श्रीलंका करीब-करीब एक जैसी टीमें या कहें तो फिसड्डी मानी जाती थीं, लेकिन अर्जुन राणातुंगा के नेतृत्व में जो बाजी श्रीलंका के खिलाड़ियों ने पलटी और देश में क्रिकेट की नई कहानी लिखना प्रारंभ किया, बहुत संभव है कि शनाका के नेतृत्व में आगामी टी-20 वर्ल्ड कप में श्रीलंका कोई बड़ा कमाल दिखाए। अब तक जो टीमें श्रीलंका को बेहद कमजोर मानने का गलती कर रही थीं, उनके लिए एशिया कप आंखें खोलने वाला है।

भारतीय खिलाड़ियों को श्रीलंकाई खिलाड़ियों से सीखने और सबक लेने की जरूरत है। पहला सबक तो यह है कि केवल स्टार खिलाड़ी बनने से आप मैच जिताऊ नहीं बन जाते हैं। एशिया कप में विराट कोहली ने 5 मैचों में 276 रन बनाए, जो पाकिस्तान के रिजवान से 5 रन ही कम हैं। 

11 विकेट भी नहीं आए काम

भुवनेश्वर कुमार 11 विकेट लेकर टूर्नामेंट के सबसे सफल बॉलर रहे, लेकिन टीम को फाइल तक भी नहीं पहुंचा सके। श्रीलंकाई टीम से सीखने की आवश्यकता है। विशेषकर यदि टॉप ऑर्डर फेल रहता है तो निचले क्रम के बल्लेबाजों को हौसला दिखाना ही चाहिए, ताकि टीम जीत सके। गेंदबाजों को विकेट लेने वाली गेंदबाजी कैसे की जाती है? यह सीखने की जरूरत है।

ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी में होने जा रहा आगामी टी-20 वर्ल्ड कप बेहद रोमांचकारी रहने वाला है। भारत को मेजबान ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और पाकिस्तान के साथ अब श्रीलंका से भी सचेत रहने की जरूरत है। भारतीय टीम मैनेजमेंट को चाहिए कि अभी से इन रणनीतियों पर काम शुरू कर दें, वरना इन सर्दियों में श्रीलंका पुनः चौका सकता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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