भारतीय टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना ने ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने मैथ्यू एबडेन के साथ मिलकर रॉड लेवर एरिना में सिमोन बोलेली और एंड्रिया ववासोरी की जोड़ी को 7-6 (7-0), 7-5 से हराया। इसके साथ ही वह ओपन एरा में ग्रैंड स्लैम जीतने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। वह 43 साल और 329 दिन की आयु में चैंपियन बने हैं। यह उनके करियर का दूसरा ग्रैंडस्लैम खिताब है। उनकी इस जीत से हर देशवासी गदगद है। पीएम मोदी से लेकर सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग जैसी कई बड़ी हस्तियों ने बोपन्ना को शुभकामनाएं दी हैं।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा "अभूतपूर्व प्रतिभाशाली रोहन बोपन्ना ने बार-बार दिखाया है कि उम्र कोई बाधा नहीं है! उनकी ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलियन ओपन जीत पर उन्हें बधाई। उनकी उल्लेखनीय यात्रा यह याद दिलाती है कि यह हमारी भावना, कड़ी मेहनत और दृढ़ता है, जो हमारी क्षमताओं को परिभाषित करती है। उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं।"
पीएम मोदी के अलावा खेल जगत के कई दिग्गजों ने रोहन बोपन्ना की तारीफ की और उनको ऐतिहासिक जीत की बधाई देते हुए कई ट्वीट किए।
बोपन्ना ने 2024 में शानदार प्रदर्शन किया। इस सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने अपने पेशेवर करियर में 500वीं जीत हासिल की। इस जीत के साथ वह 43 साल की उम्र में दुनिया के सबसे उम्रदराज शीर्ष खिलाड़ी बने थे। पद्म श्री जीतने के बाद बोपन्ना की खुशी दोगुनी हो गई जिसके बाद वह मेलबर्न पार्क में शीर्ष पर रहे। बोपन्ना ने कहा “बहुत सारी चीजें हुई हैं। 500वीं जीत से शुरुआत करना, नंबर 1 पर पहुंचना, पद्मश्री जीतना और अब... यही सपना है। इससे बेहतर कुछ नहीं, यह खूबसूरत है। कभी भी जल्दी मत करो। मेरा मतलब है कि कोई समय सीमा नहीं है। हमने वे सीमाएं स्वयं निर्धारित की हैं। आज, हम अभी भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं या वही कर रहे हैं जो हम हैं, जो हमें पसंद है। जब तक आप जो करते हैं उससे प्यार करते हैं और आप वास्तव में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, यही मायने रखता है। बोपन्ना ने कहा, मेरे लिए सबसे बड़ा संदेश यह है कि कभी हार न मानें और कभी भी खुद पर संदेह न करें।"
2017 में बोपन्ना ने पहली बार ग्रैंड स्लैम जीता था। उन्होंने फिलिप चैटरियर में रॉबर्ट फराह और अन्ना-लेना ग्रोनफेल्ड को 2-6, 6-2, 12-10 से हराकर गैब्रिएला डाब्रोव्स्की के साथ मिश्रित युगल खिताब जीता। पिछले साल मिश्रित युगल में सानिया मिर्जा के साथ जोड़ी बनाते हुए वह मेलबर्न पार्क में उपविजेता रहे थे। लेकिन मेलबर्न पार्क में पुरुष युगल में बोपन्ना को कोई रोक नहीं सका, क्योंकि उन्होंने अपने जबरदस्त खेल से भारतीय टेनिस को इतिहास का हिस्सा बनने में मदद की।