खिड़की से बेटे को देखती थी मां
प्रवीण की मां निर्दोष देवी ने बताया था कि होली से पहले को प्रवीण दिल्ली से घर आए थे। होली के बाद ही वह कोरोना संक्रमित हो गए। प्रवीण ने घर की दूसरी मंजिल पर बने कमरे में खुद को क्वारंटीन कर लिया। कोरोना के दौरान भी प्रवीण ने शारीरिक व्यायाम और हल्का अभ्यास जारी रखा। संक्रमित होने के बाद प्रवीण के कोच ने अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी। जबकि उस समय के हालात को देखते हुए परिजनों ने प्रवीण को अस्पताल में भर्ती कराने से इनकार कर दिया था।
प्रवीण जब क्वारंटीन थे तब मां को दूर से ही खाना रख लौट जाने को कहते थे। कमरे की खिड़की से बेटे को खाना खाते देख वह रोने लग जाती थीं। उनकी मां ने बताया था कि प्रवीण का लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतने का था। अब उनका यह सपना पूरा हो गया।