खेल मंत्रालय में राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों को लेकर अंदरखाते चली लंबी खीचतान के बाद अगले वर्ष से अवार्ड के नियम बदलने की तैयारी कर ली गई है। अगली बार से अवार्ड कमेटी को और अधिक शक्तियां देने का मन बनाया गया है।
साथ ही अंकों पर खरे नहीं उतरने वाले योग्य उम्मीदवारों को आवेदन नहीं करने की सूरत में भी उन्हें अवार्ड के लिए चुने जाने की छूट कमेटी को दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि खेल मंत्री विजय गोयल अवार्ड सूची में योग्यता के बावजूद टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना और महिला क्रिकेट कप्तान मिथाली राज का नाम शामिल नहीं होने पर नाराज थे।
वह इन दोनों को अवार्ड देने के हक में थे। साथ ही उन्हें कुछ नामों पर एतराज भी था। खेल मंत्री ने इन नामों को अंतिम सूची में शामिल करने को कहा तो मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें ऐसा नहीं करने की सलाह दी।
उन्होंने खेल मंत्री को हिदायत दी कि ऐसा करने पर कमेटी की सिफारिशों का औचित्य खत्म हो जाएगा साथ ही कोर्ट केसों की संख्या बढ़ेगी। वहीं मंत्रालय ने कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट वेटलिफ्टर संजीता चानू के नाम की सिफारिश की थी। संजीता का चयन कमेटी ने सर्वाधिक 45 अंक होने के बावजूद नहीं किया।
मंत्रालय ने इसी को आधार बना उनके नाम की खुद सिफारिश कर दी, लेकिन अवार्ड देने का अंतिम अधिकार खेल मंत्री के पास होता है। उनके हस्ताक्षर के बिना अवार्डियों को मंजूरी नहीं मिलती है।
मंत्रालय के अधिकारियों ने खेल मंत्री को कहा कि उन्हें उनकी ओर से दिए गए संजीता के नाम को मंजूरी नहीं देनी है तो नहीं दें, लेकिन नए नामों को नहीं जोड़ें। इसके बाद खेल मंत्री ने न नए नाम जोडे़ और न संजीता के नाम को मंजूरी दी।
सच्चाई यह भी है कि जब एक कमेटी सदस्य ने मिथाली राज के बारे में बैठक से पहले मंत्रालय के अधिकारी से बात की तो उनसे कहा गया कि उनका आवेदन नहीं आया है। इस वजह से उन्हें नहीं चुना जा सकता है। इन बातों को देखते हुए अवार्ड के नियम बदलने को कमर कसी गई है।