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Paris Olympics: पाकिस्तान पहुंचने पर अरशद नदीम का हुआ भव्य स्वागत, वॉटर कैनन सैल्यूट दिया गया

Sun, 11 Aug 2024 10:49 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लाहौर

सार

अरशद ने फाइनल में 92.97 मीटर का रिकॉर्ड थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। दूसरे स्थान पर भारत के नीरज चोपड़ा रहे थे। पाकिस्तान का यह ओलंपिक में पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक है। नदीम ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पाकिस्तान के पहले खिलाड़ी हैं।
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अरशद नदीम - फोटो : Twitter
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विस्तार
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पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले पाकिस्तान के भाला फेंक एथलीट अरशद नदीम का स्वदेश पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। उनकी फ्लाइट जैसे ही एयरपोर्ट पर लैंड हुई उसे वॉटर कैनन सैल्यूट दिया गया। अरशद ने फाइनल में 92.97 मीटर का रिकॉर्ड थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। दूसरे स्थान पर भारत के नीरज चोपड़ा रहे थे। पाकिस्तान का यह ओलंपिक में पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक है। नदीम ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पाकिस्तान के पहले खिलाड़ी हैं।
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27 वर्षीय नदीम के पिता ने अपने बेटे के गले में माला पहनाई। दो बच्चों के पिता नदीम का मिट्टी की ईटों के घर में पालन-पोषण हुआ था। उन्होंने गेहूं के खेतों में घरेलू भाला से अभ्यास शुरू किया था। उन्होंने कहा, इस स्वर्ण के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और इसके पीछे मेरे कोच सलमान बट हैं।
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पाकिस्तान का दूसरा सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जाएगा 
पाकिस्तान अरशद नदीम को देश के दूसरे सबसे बड़े पुरस्कार हिलाल-ए-इम्तियाज से सम्मानित करेगा। इसकी घोषणा शनिवार को की गई। सरकार ने अगले सप्ताह 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अज्म-ए-इस्तेहकाम (स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता) नामक एक स्मारक डाक टिकट जारी करने का भी निर्देश दिया था। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने अरशद नदीम के लिए 10 करोड़ (पाकिस्तानी) रुपये की नकद पुरस्कार की घोषणा की थी। मरियम ने यह भी कहा था कि इस खिलाड़ी के नाम पर उनके गृहनगर खानेवाल में एक स्पोर्ट्स सिटी बनाई जाएगी। मालूम हो कि राष्ट्रमंडल खेलों (2022) में स्वर्ण पदक और विश्व चैंपियनशिप (2023) में रजत पदक जीतने के बाद भी नदीम को पेरिस ओलंपिक से पहले एक नए भाले के लिए गुहार लगानी पड़ी थी। उनका पुराना भाला वर्षों के उपयोग के बाद खराब हो गया था। शायद इसीलिए नदीम ने गुरुवार को पेरिस से अपने माता-पिता को पहला संदेश दिया कि वह अब अपने गांव में या उसके आसपास एथलीटों के लिए एक उचित अकादमी बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
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