गुरचरण सिंह का जन्म 25 मार्च 1935 को हुआ था। वह एक भारतीय क्रिकेट कोच और पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर हैं। उन्होंने 12 अंतरराष्ट्रीय और 100 से अधिक प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों को प्रशिक्षित किया है। 87 साल के गुरचरण द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित होने वाले दूसरे क्रिकेट कोच हैं।
गुरचरण ने 37 प्रथम श्रेणी मैचों में 1198 रन बनाए। इनमें एक शतक और सात अर्धशतक शामिल है। उनका उच्चतम स्कोर 122 रन का रहा है। इसके अलावा 44 विकेट भी लिए हैं। 100 से अधिक प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों के अलावा, उन्होंने मनिंदर सिंह, सुरिंदर खन्ना, कीर्ति आजाद, विवेक राजदान, गुरशरण सिंह, अजय जडेजा, राहुल सांघवी और मुरली कार्तिक सहित 12 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को प्रशिक्षित किया। 1987 में देश प्रेम आजाद (1986 में सम्मानित) के बाद, वे भारत के सर्वोच्च खेल कोचिंग सम्मान द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित होने वाले दूसरे क्रिकेट कोच बने।
सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि भारत की दो प्राचीन और स्थानीय मार्शल आर्ट्स के प्रशिक्षकों को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। केरल के दिग्गज एसआरडी प्रसाद को प्राचीन मार्शल आर्ट्स कलारीपयट्टू को बढ़ावा देने और सैकड़ों लोगों को सिखाने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मार्शल आर्ट्स में योगदान के लिए ही 2016 में संगीत नाटक अकेडमी से भी सम्मानित किया गया था।
मणिपुर के स्थानीय मार्शल आर्ट्स 'थांग-ता' के कोच के शानाथोएबा शर्मा को इसे बढ़ावा देने के लिए पद्मश्री से नवाजा जाएगा। थांग-ता एक मशहूर मणिपुरी मार्शल आर्ट्स है, जिसमें मुख्य रूप से तलवार और भालों का इस्तेमाल किया जाता है। केएस शर्मा के मुताबिक, थांग-ता की मदद से ही पूर्वजों ने मणिपुर को विदेशी हमलों से बचाया था।
केंद्र सरकार ने बुधवार को देश के शीर्ष नागरिक सम्मानों का एलान किया। इस बार कुल 106 हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा। देश का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्म विभूषण इस बार छह दिग्गजों को मिला है। वहीं नौ शख्सियतों को पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा। इनके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े 91 लोगों को पद्मश्री से नवाजा जाएगा।