माता-पिता ने कर्ज लेकर कराई ट्रेनिंग
हिमाचल प्रदेश के अंब के बदाऊं कस्बे के छह फुट चार इंच लंबे निषाद को याद है जब स्कूल में उनकी लंबाई की वजह से अध्यापक ने ऊंची कूूद अपनाने को कहा। जब वह 2017 में अच्छी ट्रेनिंग के लिए पंचकूला जा रहे थे तो खेतों में मजदूरी करने वाली उनके माता-पिता ने सिर्फ 2500 रुपये देकर उन्हें भेजा था। उन्हें बाद में पता लगा कि उनकी तैयारियों के लिए माता-पिता ने लोगों से और बैंक से कर्ज लिया। उन्हें कभी इस बारे में नहीं बताया। बाईस वर्षीय निषाद चाहते हैं कि इस पदक के बाद उनकी सरकारी नौकरी लग जाए। वह मां को सरकारी नौकरी का तोहफा देना चाहते हैं। फिलहाल वह जालंधर के नजदीक लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं।
मरियप्पन के स्वर्ण से पैरा एथलेटिक्स का पता लगा
निषाद को 2016 तक पैरा खेलों के बारे में पता तक नहीं था। वह 2018 तक आम एथलीटों के साथ स्पर्धा में शिरकत करते रहे। रियो पैरालंपिक में जब टी मरियप्पन और वरुण भाटी ने ऊंची कूद में पदक जीते तो गांववालों ने उनसे कहा कि वह भी इसमें किस्मत आजमा सकते हैं। इसके बाद ही उन्होंने पैरा एथलेटिक्स को अपनाया। वह आम एथलीटों के स्कूल नेशनल में 10वें स्थान पर रहे थे।