इस बीच टोक्यो में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। सोमवार को वहां 317 नए मामले सामने आए। एक हफ्ते पहले के सोमवार को यहां 236 मामले सामने आए थे। यहां के अखबार जापान टाइम्स के एक विश्लेषण में बताया गया है कि एक हफ्ते पहले हर रोज जितने मामले सामने आए थे, पिछले एक हफ्ते में प्रति दिन उससे तकरीबन 100 मामले ज्यादा सामने आए हैँ। इस सोमवार को पूरे हफ्ते में टोक्यो में नए मामले सामने आने का रोजाना औसत 489 रहा। जबकि उसके पहले वाले हफ्ते में ये औसत 391 था। इस रूझान ने ओलंपिक खेलों को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) और टोक्यो ओलंपिक्स की आयोजन समिति खेलों को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक कराने पर आमादा हैं। इसलिए अब दुनिया भर में आईओसी और आयोजन समिति के रुख पर सवाल उठाए जाने लगे हैं। आलोचकों ने कहा है कि आयोजक खेलों के रद्द होने से होने वाले आर्थिक नुकसान को उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए वे लोगों की सेहत पर ओलंपिक्स कराने को तरजीह दे रहे हैं। अमेरिका में मैसाचुसेट्स स्थित स्मिथ कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एंड्रयू जिमबलिस्ट ने अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी से कहा, आर्थिक और आईओसी की प्रतिष्ठा को लेकर वहां बहुत कुछ दांव पर लगा है।
डॉक्टरों ने लगाता कहा है कि इन खेलों के आयोजन के कारण वायरस को फैलने का मौका मिल सकता है, जिससे संक्रमण के नए मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए जापान के की जन समूह इन खेलों को रद्द कराने का अभियान अभी भी चला रहे हैं। हाल ही में टोक्यो में लगाए गए एक पोस्ट में कहा गया, हमारी मेडिकल क्षमता अपनी हद पर पहुंच चुकी है, ओलंपिक खेलों को रोको। एक दूसरे पोस्टर पर लिखा है, हमें राहत की सांस लेने दो अभी ओलंपिक कराना असंभव है।
गौरतलब है कि टोक्यो ओलंपिक का आयोजन 2020 में ही होना था। लेकिन तब कोरोना महामारी की पहली लहर के कारण इसे टाल दिया गया था। तब आयोजकों ने उम्मीद की थी कि एक साल बाद महामारी काबू में आ जाएगी। लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ है। बल्कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट और स्ट्रेन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में एक बार फिर से संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। इस बीच एक बार फिर ध्यान महामारी पर केंद्रित हो गया है। यहां कई पर्यवेक्षकों ने सवाल उठाया है कि आखिर ऐसे समय में ओलंपिक खेलों में किसकी दिलचस्पी होगी?
एनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक खेलों के आयोजन को लेकर आईओसी के अंदर भी मतभेद हैं। मसलन, जूडो में ओलिंपिक पदक जीत चुकीं एथलीट और अब जापान में आयोजन समिति की सदस्य काओरी यामागुची ने हाल में कहा- ऐसा लगता है कि आईओसी के लिए जापान के जनमत का कोई महत्त्व नहीं है।