शिविर में आकर अच्छा खाना मिला
नीरज के मुताबिक 2014 राष्ट्रीय खेलों में पांचवें स्थान पर रहने के बाद उन्हें राष्ट्रीय शिविर में शामिल कर लिया गया। यहां आकर लगा कि जिंदगी बदल गई है। पहले वह खुद खाना बनाते थे। भाला भी स्तरीय नहीं था, लेकिन शिविर में अच्छा खाना और भाला मिला तो वहीं से बुलंदियों का सफर शुरू हो गया।
चीफ कोच पहली बार लेकर गए थे झंडे
एथलेटिक्स के चीफ कोच राधाकृष्णन ने कहा कि इस बार जिस तरह से विदाई समारोह आयोजित किए जा रहे थे, अलग माहौल लग रहा था। उन्हें तभी लगा कि इस बार ओलंपिक में कुछ खास होगा। एथलेटिक्स में पदक नहीं आते हैं तो कोई चीफ कोच अपने साथ तिरंगा झंडा लेकर नहीं जाता है, लेकिन वह चार तिरंगे लेकर गए। उन्हें लग रहा था कि एथलेटिक्स में तीन तिरंगों की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने एक और अतिरिक्त झंडा रख लिया। नीरज ने इनका मान रख लिया।
भाला फेंक दिवस के रूप में मनाया जाएगा सात अगस्त
नीरज के लिए नहीं सात अगस्त का दिन हर देशवासी के लिए खास हो गया है। एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) ने इस दिन को पूरी तरह नीरज को समर्पित कर दिया है। एएफआई प्लानिंग कमीशन के चेयरमैन डॉ. ललित भनोट ने सात अगस्त को भाला फेंक दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया है। इस दिन पूरे देश में भाला फेंक की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं करवाई जाएगी। बाद में इन्हें जिला स्तर तक बढ़ाया जाएगा। नीरज ने कहा कि सुनकर अच्छा लग रहा है कि एएफआई ने उनके लिए यह दिन ऐतिहासिक बना दिया है।