दरअसल, हुब्बार्ड को लेकर कई एथलीटों, महिला खेलों और निष्पक्षता के पैरोकारों का कहना है कि उन्हें महिला वर्ग में शामिल कर अनुचित लाभ दिया गया है। आलोचकों का कहना है, वह एक पुरुष के तौर पर बड़ी हुई हैं और इसका उन्हें शारीरिक रूप से फायदा मिलेगा, जिससे सामान्य महिला खिलाड़ियों को को उनकी मौजूदगी से परेशानी होगी। बता दें कि एक दशक पहले खेल छोड़ने से पहले हुब्बार्ड पुरुष वर्ग में हिस्सा लेती रहीं। हुब्बार्ड ने साल 2017 के विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर और ओशिनिया चैम्पियनशिप 2019 में स्वर्ण पदक जीता है।
टोक्यो में पहुंचने के बाद से ही न्यूजीलैंड ओलंपिक समिति ने हुब्बार्ड का बचाव किया। समिति कि अध्यक्ष केरिन स्मिथ ने कहा था कि हुब्बार्ड ने एक ट्रांसजेंडर एथलीट के सभी क्वालिफिकेशन पैमानों को पूरा किया है। वह टोक्यो में पदक जीतने का सपना पूरा करना चाहती हैं। वहीं ओलंपिक समिति के चिकित्सा निदेशक रिचर्ड बजेट का कहना है, हुब्बार्ड एक महिला हैं और वह खेल संघ के नियमों के तहत ही हिस्सा ले रही हैं। हमें उनके साहस और दृढ़ता के लिए हौसला अफजाई करनी होगी।