उनमें ही टेनिस का मिक्स्ड डबल्स भी है। इसका स्वर्ण पदक रूस के आंद्रेय रुबलेव और अनास्तेसिया पावल्युचेंकोवा की जोड़ी ने जीता। रुबलेव ने अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा- ‘ओलंपिक खेलों में रूसी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, यह बहुत खास बात है।’ इसी तरह माकसिम ख्रमोतकोव ऐसे पहले खिलाड़ी बने, जिन्होंने रूस के लिए ताएकवोंडो में स्वर्ण पदक जीता। उसके अगले ही दिन इस खेल की एक दूसरी श्रेणी का स्वर्ण पदक रूस के व्लदीस्लाव लेरिन ने जीता। 1996 के बाद पहली बार रूस की पुरुष और महिला जिमनास्टिक टीमों ने स्वर्ण पदक जीता है।
कई रूसी खिलाड़ियों ने इस पर अफसोस जताया कि उनकी कामयाबी के समय उन्हें अपने देश का झंडा लहराने या देश का राष्ट्र गान सुनने का मौका नहीं मिला। लेकिन रूसी खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन की चौतरफा तारीफ हुई है। इसका श्रेय सोवियत जमाने में बने सिस्टम और खिलाड़ियों की मेहनत और लगन को दिया गया है।
जब खेलों का आरंभ हुआ तब आरओसी ने एक बयान में कहा था- ‘कोई चाहे या न चाहे हम यहां पहुंच चुके हैं। माफ उन्हें कीजिए जो कमजोर हैं। ईश्वर न्याय करता है। हमारे लिए वह हमारा सहायक भी है।’ रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने इंस्टाग्राम पर डाले गए एक पोस्ट में कहा था- आरओसी, हम कामयाब होंगे। उसके बाद देश में सोशल मीडिया पर यही वाक्य हैशटैग के रूप में ट्रेंड करने लगा। अब जबकि ओलंपिक खेल समापन के करीब हैं, पर्यवेक्षकों का कहना है कि रूसी खिलाड़ियों ने अपने देशवासियों के भरोसे को सही साबित कर दिखाया है।