कपिल: आपने तो इतिहास रच दिया है, अब माँ-बाप बच्चों को इंजीनियर-डॉक्टर बनने को नहीं बल्कि नीरज जैसा बनने को बोलेंगे
नीरज: आप सभी को देखकर हम जैसों का मार्गदर्शन हुआ, हमने मेहनत की, हम भी कोशिश कर रहे हैं कि हम कुछ अच्छा करें देश के लिए, आने वाली पीढ़ी भी हमसे सीखे। ऐसे ही चलता है ये, एक-दूसरे से सीखते हैं हम।
कपिल: जेवलिन का शौक कहां से आया और क्या जेवलिन जो इतना महंगा मिलता है, उसे लाना आसान था?
नीरज: मुझे इस खेल के बारे में नहीं मालूम था, मेरे लिए बिलकुल नया खेल था, पता नहीं था कि इसमें भी करियर बनता है, लेकिन मुझे ये अच्छा लगा और मैंने इसे करना शुरू किया और कोच के साथ मिलकर मेहनत करते-करते यहां तक पहुंचा।
कपिल: किन लोगों ने आपकी मदद की?
नीरज: परिवार ने किया, मेरे अंकल मुझे स्टेडियम ले गए, दूसरों को फेंकते देखा तो खुद भी करने लगा।
कपिल: बचपन में क्या कहकर बुलाते थे?
नीरज: बचपन में कोई मोटा बोलता था, कभी सफेद रंग का कुर्ता पहनता था तो कोई सपरंच बोलता था।
कपिल: शादी का दबाव आयेगा, कैसे संभालोगे?
नीरज: अभी सारा फोकस खेल पर ही रखूंगा, शादी तो जब होनी होगी तो अपने समय पर हो जाएगी।
कपिल: कोई खुद की पसंद है या परिवार की पसंद से होगी?
नीरज: नहीं ऐसा कुछ अभी नहीं है, जब होगी तो देखेंगे।
कपिल: ओलंपिक की तैयारी में लगेंगे या कुछ और करेंगे?
नीरज: थोड़े दिन परिवार के साथ बिताऊंगा और फिर ट्रेनिंग शुरू करूँगा, अगले साल कॉमनवेल्थ, एशियाई चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप भी है, इस बार तीन साल में ही ओलंपिक भी आ जाएगी तो समय अधिक नहीं है।
कपिल: आने वाली पीढ़ी को आप कैसे मदद करेंगे?
नीरज: खिलाड़ी अच्छा खेले और अपने देश और आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करें, मैं ऐसा करता रहूंगा।
कपिल:
आपको पूरे देश और खेल परिवार की तरफ से बहुत-बहुत मुबारकें, आप आएंगे तो हमारे कंधों पर घूमेंगे।