भारतीय जेवलिन खिलाड़ी (भाला फेंक) देवेंद्र झांझरिया ने अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ते हुए रियो पैरालंपिक में गोल्ड जीत लिया है। झांझरिया ने एफ46 इवेंट के फाइनल में 63.97 मीटर दूर भाला फेंका और इस खेल में अपना दूसरा गोल्ड जीत लिया।
झांझरिया ने दूसरी बार पैरालंपिक गोल्ड जीता है। इससे पहले भी वर्ल्ड रिकॉर्ड उन्हीं के नाम था। झांझरिया दो पैरालंपिक गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। वर्ल्ड के नंबर तीन भाला फेंक खिलाड़ी की इस गोल्डन कामयाबी के बाद भारत की झोली में अब कुल 4 पदक हो गए हैं।
राजस्थान में पैदा हुए देवेंद्र ने एथेंस 2004 पैरालंपिक में 62.15 मीटर की रिकॉर्ड दूरी पर भाला फेंककर गोल्ड जीता था। 36 वर्षीय पैरालंपिक खिलाड़ी को 2004 में अर्जुन पुरस्कार मिला था। 2012 में देवेंद्र पद्मश्री प्राप्त करने वाले पहले दिव्यांग भारतीय खिलाड़ी बने।
देवेंद्र के साथी दूसरे भारतीय खिलाड़ी रिंकू हूडा ने 54.39 मीटर की दूरी पर भाला फेंक पांचवां स्थान प्राप्त किया। झांझरिया पहली बार पैरालंपिक मे एथेंस में 2004 में नजर आए और तब उन्होंने गोल्ड जीता। 2008 और 2012 में एफ46 इवेंट को पैरालंपिक में जगह नहीं मिली और उन्हेें भाग लेने का मौका नहीं मिला।