बागपत के बिनौली गांव की जिस शूटिंग रेंज ने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता सौरभ चौधरी जैसा शूटर दिया उस पर अब ताला लग गया है। रेंज बंद क्या हुई सौरभ के कोच अमित श्योराण के दुर्दिन शुरू हो गए।
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अमित को दिल की गंभीर बीमारी ने घेर लिया है। उनके दिल की धमनियों में 90 प्रतिशत ब्लाकेज निकली है और डॉक्टरों ने बाईपास सर्जरी से इंकार कर दिया है। अमित अपनी जिंदगी के लिए अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। जिस रेंज से उनके घर को दो वक्त की रोटी नसीब होती थी उसके बंद होने से उनकी आय के सारे साधन बंद हो गए हैं।
खुद सौरभ ने की कोच के कैश अवार्ड की सिफारिश
खुद सौरभ चौधरी नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) और खेल मंत्रालय को अपने कोच के लिए अमित को लगभग नौ लाख रुपये का कैश अवार्ड दिए जाने के लिए लिख चुके हैं, लेकिन आज तक यह पैसा अमित को नहीं दिया गया। यह पैसा उनके पास होता तो इस वक्त उनके इलाज में मदद करता।
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रेंज बंद होने के बाद बिगड़ी तबियत
टोक्यो ओलंपिक के बाद से ही अमित का बुरा वक्त शुरू हो गया। बिनौली में जिस जमीन पर उनकी रेंज चल रही थी। उसे उन्हें बिना किराए के दान में दिया गया था। लेकिन मालिक को जमीन चाहिए थे जिसके चलते उन्होंने अमित से रेंज खाली करने के लिए कह दिया। अमित के पास रेंज खाली करने के अलावा चारा नहीं था। अमित इसमें कई होनहार शूटरों को ट्रेनिंग दे रहे थे।
रिश्तेदारों से पैसा लेकर दाखिल हुए अस्पताल
रेंज बंद होते ही अमित की तबियत बिगड़ी। उन्हें दिल्ली के अस्पताल में रिश्तेदारों से पैसा लेकर कई दिनों तक दाखिल रहना पड़ा। पैसों की कमी के चलते उन्होंने करनाल के अस्पताल से एंजियोग्राफी कराई। यहीं उन्हें 90 प्रतिशत ब्लाकेज का पता लगा। अब वह रोजाना लाइन में लगकर एम्स में इलाज के लिए भटक रहे हैं। इतनी बुरी स्थिति में होने के बावजूद अमित को अपने शूटरों की फिक्र है। वह कहते हैं कि खेल मंत्रालय का कैश अवार्ड मिल जाए तो वह अपना ठीक से इलाज कराकर इन शूटरों के लिए नई रेंज खड़ी करेंगे।