भवानी ने कहा, 'भारत में तलवारबाजी क्योंकि नया खेल है तो यह अभी आगे बढ़ रहा है, लेकिन इटली या किसी अन्य देश में वे 100 से ज्यादा वर्षों से इसे खेल रहे हैं। इसलिए हमें उस स्तर तक पहुंचने के लिए अन्य देशों से दोगुनी मेहनत करनी होगी।'
उन्होंने कहा, 'इसलिए मैंने हमेशा कड़ी मेहनत की, जैसे मैं दिन में तीन सत्र में अभ्यास करती और शनिवार को भी ट्रेनिंग करती इसलिए मैं यहां तक पहुंचने में सफल रही।' भवानी ने कहा, 'अगर मैं ट्रेनिंग में जरा भी कमी कर देती तो मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती। हमें तलवारबाजी में काफी पैसा खर्च करना होता है क्योंकि मुझे ज्यादा अंक जुटाने के लिए काफी सारे टूर्नामेंट में हिस्सा लेना पड़ा तो इसमें अन्य का सहयोग भी काफी अहम रहा।'
शुरुआती दिनों की परेशानियों के बारे में बात करते हुए इस तलवारबाज ने उन दिनों को याद किया जब इस खेल से जुड़ने के लिए उन्होंने स्कूल में झूठ भी बोला था। उन्होंने कहा, 'उन्होंने मुझसे मेरे पिता की सालाना आय पूछी थी और कहा कि तलवारबाजी बहुत मंहगा खेल है, अगर तुम गरीब परिवार से हो तो तुम इसका खर्चा नहीं उठा पाओगी। लेकिन मैंने झूठ बोला और अपने पिता की आय ज्यादा बता दी।'
उन्होंने कहा, 'शुरू में जब तलवार काफी महंगी होती तो हम बांस की लकड़ियों से खेला करते थे और अपनी तलवार केवल टूर्नामेंट के लिए ही इस्तेमाल करते थे क्योंकि अगर ये टूट जातीं तो हम फिर से इनका खर्चा नहीं उठा सकते थे और भारत में इन्हें खरीदना आसान नहीं है, आपको ये आयात करनी पड़ती हैं।'
भारतीय तलवारबाजी संघ के अध्यक्ष राजीव मेहता भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे, उन्होंने कहा, 'हम देश भर में 50 तलवारबाजी अकादमियां खोल रहे हैं। प्रत्येक अकादमी में 20 से 30 खिलाड़ी होंगे।' उन्होंने कहा, 'जिला स्तर पर भी हम 50 केंद्र खोलेंगे। खेल मंत्री ने भी हमसे 31 मार्च तक 20 करोड़ रुपये खर्च करने को कहा है तो हमें यह लक्ष्य 31 मार्च तक पूरा करना है। यह पहली बार है जब तलवारबाजी को सरकार से इतना सहयोग मिला है।'