मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों को राष्ट्रपति सम्मानित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तमाम पुरस्कारों की शुरुआत कब हुई थी? आइए जानते हैं...
खेल पुरस्कार पाना किसी भी खिलाड़ी का सपना होता है। हर साल भारत के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को यह दिया जाता है। हालांकि, अवॉर्ड पाने वाले खिलाड़ी का चयन कई मापदंडो के आधार पर होता है। यह पुरस्कार जीतने वाला खिलाड़ी किसी भी खेल से हो सकता है। अब तक कुल 43 खिलाड़ियों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है।
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मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों को राष्ट्रपति सम्मानित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तमाम पुरस्कारों की शुरुआत कब हुई थी और कितनी राशि पुरस्कार के रूप में विजेता खिलाड़ियों को प्रदान की जाती है। आइए बताते हैं आपको...
मेजर ध्यानचंद खेल रत्न
मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार
- फोटो : सोशल मीडिया
मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार हॉकी के जादुगर मेजर ध्यानचंद की स्मृति में दिया जाता है। यह भारत में सर्वोच्च स्थान प्राप्त राष्ट्रीय खेल पुरस्कार है। 'खेल रत्न' का अर्थ है, यह पुरस्कार उन खिलाड़ियों के लिए प्रस्तुत किया जाता है, जिन्होंने खेल के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन किया है।
ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद को वर्ष 1991-92 में पहली बार खेल रत्न से सम्मानित किया गया था। इस पुरस्कार में एक पदक, एक प्रशस्ति पत्र और 25 लाख रूपये दिए जाते हैं। इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेल रत्न पुरस्कार का नाम राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया था।
अर्जुन पुरस्कार
अर्जुन पुरस्कार
- फोटो : सोशल मीडिया
भारत में सबसे पुराना राष्ट्रीय खेल पुरस्कार अर्जुन पुरस्कार है। वर्ष 1961 में इसकी शुरुआत हुई थी। खेल में अपनी उत्कृष्टता के लिए खेल हस्तियों को समर्पित यह पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न के बाद दूसरा सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। यह पुरस्कार लगातार चार वर्ष तक बेहतरीन प्रदर्शन, लीडरशिप क्वालिटी, खेल भावना और अनुशासन के लिए दिया जाता है।
पुरस्कार के रूप में पहले पांच लाख रुपये की राशि दी जाती थी, जो 2020 से 15 लाख रूपये कर दी गई। इसके अलावा अर्जुन की कांस्य प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। साल 1961 में इस पुरस्कार को कुल छह खिलाड़ियों को दिया गया था। जिसमें सलीम दुरानी इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले क्रिकेटर थे।
द्रोणाचार्य पुरस्कार
द्रोणाचार्य पुरस्कार
- फोटो : सोशल मीडिया
वर्ष 1985 में शुरू हुआ द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रतिष्ठित प्रशिक्षकों को दिया जाता है, जिनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में देश का मान बढ़ाते हैं और मेडल जीतकर लाते हैं। इस पुरस्कार से खिलाड़ियों के कोच को सम्मानित किया जाता है। द्रोणाचार्य पुरस्कार के तहत गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा, प्रमाणपत्र, पारंपरिक पोशाक दिया जाता है। नए घोषणा के तहत इस बार द्रोणाचार्य विजेताओ (आजीवन) की इनामी राशि पांच से 15 लाख रूपये कर दी गई तो वहीं नियमित द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं को 10 लाख रूपये प्रदान दिए गए जो पहले पांच लाख रूपये होते थे। द्रोणाचार्य पुरस्कार केवल उन्हीं कोचों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने लगातार तीन वर्षों तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर शानदार काम किया हो।