भारतीय पुरुष हॉकी टीम के दीवार कहे जाने वाले अनुभवी गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने पहले ही कहा था कि पेरिस ओलंपिक उनका अंतिम अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट होगा और वह इसके बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लेंगे। भारत ने गुरुवार को स्पेन को 2-1 से हराकर कांस्य पदक जीता और इसके साथ ही श्रीजेश ने हॉकी को अलविदा कह दिया। श्रीजेश लंबे समय से भारतीय हॉकी टीम के अहम सदस्य रहे हैं, ऐसे में उनसे संन्यास का फैसला वापस लेने की मांग भी की जा रही है। अब उन्होंने इस लेकर चुप्पी तोड़ी है।
श्रीजेश भारतीय टीम के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जो टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक टीम का भी हिस्सा रहे थे। श्रीजेश ने पेरिस ओलंपिक में भी शानदार प्रदर्शन किया और विरोधी टीम के सामने दीवार बनकर खड़े रहे। स्पेन के खिलाफ कांस्य पदक मुकाबले में भी श्रीजेश ने अंतिम क्वार्टर में शानदार बचाव किए थे और उन्हें बढ़त लेने से रोका था। इस तरह टीम ने श्रीजेश को जीत के साथ विदाई दी।
संन्यास का फैसला नहीं बदलेंगे श्रीजेश
भारत के महान गोलकीपरों में शुमार पीआर श्रीजेश ने लगातार दूसरा ओलंपिक कांस्य पदक जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास के अपने फैसले को बदलने की संभावना से इन्कार करते हुए कहा, यह विदा लेने का सही समय है। मुझे लगता है कि ओलंपिक खेलों से विदा लेने का यह सही तरीका है, एक पदक के साथ। हम खाली हाथ घर नहीं जा रहे जो बड़ी बात है। मैं लोगों की भावनाओं का सम्मान करता हूं लेकिन कुछ फैसले कठिन होते हैं। सही समय पर फैसला लेने से हालात खूबसूरत हो जाते हैं। इसलिए मेरा फैसला नहीं बदलेगा। टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है और इस मैच को इतना यादगार बना दिया। टोक्यो में मिले पदक की मेरे दिल में खास जगह है। इससे हमें आत्मविश्वास मिला कि हम ओलंपिक में पदक जीत सकते हैं।