17 बरस की डिफेंडर सलीमा टेटे झारखंड के आदिवासी अंचल से आकर भारत की सीनियर महिला हॉकी टीम में नियमित जगह बनाने को बेताब हैं। सलीमा ने 10 बरस से भी कम उम्र में सबसे पहले हॉकी थामी और फिर सिमडेगा के बालिका स्पोटर्स हॉस्टल में अपनी शुरुआती हॉकी कौशल निखारने के साथ बहुत जल्द ही भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम में चमक दिखाई।
अब सलीमा टेटे बेंगलुरू में भारत के चीफ डच हॉकी उस्ताद शुएड मराइन के मार्गदर्शन में भारत की 33 कोर ग्रुप की सीनियर संभावितों के साथ पसीना बहाने में जुटी हैं। सलीमा के साथ झारखंड की भारत की कोर ग्रुप की इन संभावितों में शामिल दूसरी खिलाड़ी निकी प्रधान हैं।
निकी अब खुद को भारत की रक्षापंक्ति की मजबूत कड़ी के रूप में स्थापित कर चुकी हैं। हॉकी इंडिया के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर डेविड जॉन सिमडेगा की 'किले की मजबूती प्रहरी' सलीमा टेटे के कायल हैं। सलीमा टेटे अपनी कप्तानी में भारत को बीते बरस ऑस्ट्रेलिया में यूथ ओलंपिक में रजत दिलाने के बाद वह सुर्खियों में आई।
तभी से डेविड उन्हें भारतीय हॉकी की कल की 'नायिका' के रूप में देखते हैं। भारत की सीनियर कोर ग्रुप की 33 संभावितों में शामिल सलीमा टेटे ने 'अमर उजाला' से कहा, 'अब हॉकी में हम आदिवासी खिलाड़ियों को झारखंड और देश में बहुत सुविधाएं मिल रही हैं। मैं हॉकी जहां भी पहुंची उसमें मेरे पिता सुलक्षण टेटे की हौसलाअफजाई का बहुत बड़ा योगदान है।'
'मैं 2016 में 15 बरस ही भारत की सीनियर महिला हॉकी टीम के शिविर में आ गई थी। मेरी तमन्ना भारतीय हॉकी में वही मुकाम हासिल करने की है जो कि कप्तान स्ट्राइकर रानी रामपाल ने हासिल किया है। हमारे मौजूदा कोच शुएर्ड मराइन का सारा फोकस मजबूत स्ट्रक्चर पर है। मैं खुद को अब उन्हीं की रणनीति के मुताबिक ढाल कर अपना खेल निखारने में लगी हूं। मैं खुद को भारत की रक्षापंक्ति की मजबूत प्रहरी के स्थापित करने में लगी हूं।'
सलीमा बताती है, 'मेरे छोटी बहन महिमा टेटे भी हॉकी खेलती हैं। एक लिहाज से हमारे घर में हॉकी का माहौल है। जब हम बहनें घर मे होती हैं तब भी चर्चा हॉकी पर होती है। कोच कोई भी हो मैं ध्यान बराबर उनसे कुछ नया सीखने और अपना खेल बेहतर करने पर लगाती हूं।'