जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की दावेदारी पहले ही समाप्त हो चुकी थी लेकिन शनिवार को मुकाबला नौवें और 10वें स्थान के लिए चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से था।
मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में इस वर्ल्ड कप के दौरान इतनी भीड़ कभी नहीं जुटी। अगर इस मैच में भारतीय टीम को जीत मिलती तो शायद इस वर्ल्ड कप में उसके खराब प्रदर्शन के सारे पाप धुल जाने थे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
अपने समकक्ष की टीम पाकिस्तान ने भी भारतीय टीम के ताबूत में अंतिम कील ठोकते हुए उसके जूनियर हॉकी प्रोग्राम की पूरी तरह से पोल खोल दी। पाकिस्तान ने यह मुकाबला पेनाल्टी शूटआउट में 5-3 से जीता।
पूरे टूर्नामेंट की कहानी इस मैच में भी दोहराई गई। भारतीय टीम ज्यादातर समय आक्रमण पर रही। उसने पोल पर निशाने भी साधे लेकिन गोल नसीब नहीं हुआ। वहीं, पाकिस्तान ने पूरे मैच में सिर्फ एक निशाना साधा और वह भी गोल में परिवर्तित हुआ। यह गोल सातवें मिनट में मोहम्मद दिलबर के पास पर रिजवान अली ने किया।
अगले 28 मिनटों में भारतीय अग्रिम पंक्ति ने आक्रमण की झड़ी लगा दी लेकिन रिजवान जूनियर और मोहम्मद तौसीर के जबरदस्त रक्षण के आगे गोल तो छोड़िए, एक भी पेनाल्टी कॉर्नर हासिल नहीं हुआ। दूसरे हाफ में भी यही नजारा देखने को मिला। खेल समाप्त होने में जब चार मिनट बाकी थे, ऐसे में भारत को दूसरा पेनाल्टी कॉर्नर हासिल हुआ। यहां गुरजिंदर ने गोली मजहर अब्बास को छकाने में कोई गलती नहीं की। 70 मिनट पूरे होने पर दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थी।
मुकाबले को परिणाम के लिए पेनाल्टी शूटआउट में ले जाना पड़ा। शूटआउट में एक समय 2-2 की बराबरी पर रिजवान जूनियर के प्रयास को गोलकीपर हरजोत ने बेकार कर भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ा दी। लेकिन इमरान खान मौके का फायदा उठाने से चूक गए।
मजहर ने उन्हें भी गोल नहीं करने दिया। पाक कप्तान उमर ने गोल करके पाकिस्तान को 3-2 की बढ़त दिलाई। लेकिन सतवीर सिंह की ड्रिबलिंग को बेकार कर मजहर ने पाक की बढ़त को मजबूत कर दिया। अब जीत के लिए दिलवर को गोल करना था, जिन्होंने आसानी से अपने काम को अंजाम देकर पाकिस्तान को जीत के साथ नौवां स्थान दिला दिया।