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हॉकी में भारत की ऐतिहासिक जीत का एनालिसिस: जर्मनी के हर वार का तोड़ निकाला, 24 में से 20 गोल शॉट बचाकर इतिहास रचा

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो। Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 05 Aug 2021 10:08 AM IST

सार

  •  भारत ने कांस्य पदक के मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से हराकर 41 साल बाद ओलंपिक में पदक जीता
  • इस जीत के बाद मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली टीम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई
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भारतीय हॉकी टीम की जीत में गोलकीपर श्रीजेश ने अहम भूमिका निभाई। - फोटो : Twitter

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने गुरुवार को कांस्य पदक के मुकाबले में जर्मनी को करारी शिकस्त दी। इसी के साथ भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में पदक अपने नाम किया। जर्मनी की टीम अपने आक्रामक खेल के लिए जानी जाती है और भारत ने इसी बात का खास ख्याल रखा। उसने न सिर्फ जर्मनी के आक्रमण का बखूबी जवाब दिया, बल्कि मौका मिलने पर गोल करने से भी नहीं चूका। आइए जानते हैं भारत की ऐतिहासिक जीत के 5 अहम कारण...

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भारतीय हॉकी टीम की जीत में गोलकीपर श्रीजेश ने अहम भूमिका निभाई। - फोटो : Twitter
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने गुरुवार को कांस्य पदक के मुकाबले में जर्मनी को करारी शिकस्त दी। इसी के साथ भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में पदक अपने नाम किया। जर्मनी की टीम अपने आक्रामक खेल के लिए जानी जाती है और भारत ने इसी बात का खास ख्याल रखा। उसने न सिर्फ जर्मनी के आक्रमण का बखूबी जवाब दिया, बल्कि मौका मिलने पर गोल करने से भी नहीं चूका। आइए जानते हैं भारत की ऐतिहासिक जीत के 5 अहम कारण...

1. जर्मनी के आक्रमण के खिलाफ प्लानिंग

भारत की जीत का सबसे बड़ा कारण रही- जर्मनी के अटैक के खिलाफ उसकी प्लानिंग। भारत ने जर्मनी के आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जर्मनी ने मैच में कुल 24 गोल शॉट लगाए। इसमें भारतीय डिफेंडरों ने 20 बार उसे कामयाब नहीं होने दिया।

2. शानदार डिफेंस के साथ अटैक किया

भारत ने अपने शानदार डिफेंस के जरिए जर्मनी के 83 फीसदी गोल के प्रयासों को नाकाम किया। इसके साथ भारत ने भी अटैक जारी रखा और गोल के मौके बनाए। जब भी भारत को मौका मिला, उसने गोल कर मैच में वापसी की और अंत में निर्णायक बढ़त बनाई।

3. पैनल्टी स्ट्रोक और कॉर्नर को गोल में तब्दील किया

मैच में भारत को कुल छह पैनल्टी कॉर्नर और एक पैनल्टी स्ट्रोक मिला। भारत ने इन मौकों को नहीं गंवाया। इसके अलावा भारत ने चार बार भारत ने फील्ड गोल के मौके बनाए और इनके जरिए दो गोल दागे। 

4. श्रीजेश जर्मनी के सामने दीवार बने रहे

भारत की दीवार कहे जाने वाले गोलकीपर श्रीजेश ने देश को निराश नहीं किया। उन्होंने मुकाबले में 13 गोल शॉट में से 9 बार जर्मनी को नाकाम किया। मैच के अंतिम पलों में भी जर्मनी को पैनल्टी कॉर्नर मिला था। अगर जर्मनी यह गोल कर लेता, तो मैच का फैसला पैनल्टी शूटआउट के जरिए होता, लेकिन श्रीजेश ने ऐसा नहीं होना दिया।

5. पिछड़ने के बावजूद निशाने से नहीं चुके

भारत और जर्मनी के बीच सबसे बड़ा अंतर रहा- शूटिंग एफिशिएंसी का। जर्मनी के मुकाबले भारत की शूटिंग एफिशिएंसी कहीं बेहतर रही। जर्मनी के खिलाड़ियों की एफिशिएंसी 17 फीसदी रही, जबकि भारत की ओर यह कहीं ज्यादा 45 फीसदी रही।
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