वह कहते हैं, ‘किसी भी खिलाड़ी के भारतीय टीम में स्थान बनाने के लिए उसे निरंतर बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी है। इसके लिए सबसे अहम शर्त है खिलाड़ी की फिटनेस। हम बराबर अपने सभी विकल्पों को आजमा रहे हैं। भुवनेश्वर में हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल में हमें फाइनल खेलना चाहिए था, लेकिन हम बहुत करीब से चूक गए। हमारे प्रयोग भुवनेश्वर में भी सार्थक रहे। न्यूजीलैंड दौरे पर हमारे नौजवान खिलाड़ियों की टीम ने वहां ‘डी’ में घुस कर चाहे वह बेल्जियम जैसी मजबूत टीम रही हो या न्यूजीलैंड सभी के खिलाफ बराबर हमले बोले।
हम बेल्जियम से एक मैच जीते दो बार हारे, जिनमें एक में शूटआउट में। बेल्जियम अपनी पूरी मजबूत टीम के साथ न्यूजीलैंड में टूर्नामेंट में शिरकत करने आया था। वहां हमारे लड़कों ने उसके खिलाफ दमदार प्रदर्शन कर दिखाया कि वे अब दुनिया की किसी भी मजबूत से मजबूत टीम को टक्कर देने को तैयार हैं। हमने जूनियर टीम के विवेक सागर प्रसाद और दिलप्रीत सिंह को न्यूजीलैंड दौरे पर आजमाया और दोनों ने बेल्जियम जैसी मजबूत टीम के खिलाफ गोल कर सुनहरे भविष्य की उम्मीद जगाई है। साथ ही इससे हमारे पास अब टीम चुनने के लिए खिलाड़ियों का बड़ा पूल होगा।