अभी मैच समाप्त होने में 30 सेकंड का समय बाकी था और मैदान के साथ जर्मनी के डगआउट में जीत का जश्न शुरू हो चुका था। हो भी क्यों नहीं, आखिर जर्मनी अपने खिताब की रक्षा करते हुए एक बार फिर जूनियर वर्ल्ड हॉकी चैंपियन बनने जा रहा था।
यह वही जर्मनी टीम थी जिसे टूर्नामेंट के पहले ही मैच में बेल्जियम के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी लेकिन उसके बाद इस टीम का मेजर ध्यानचंद स्टेडियम पर सफर हुआ तो वह चैंपियन बनने के बाद ही जाकर समाप्त हुआ। फारवर्ड निकलस वेलेन ने हैट्रिक जमाकर फ्रांस को ना सिर्फ वर्ल्ड कप में उसके सुहाने सफर को खत्म किया बल्कि उन्हें इतिहास बनाने से भी रोक दिया।
5-2 की स्कोर लाइन यह बतास रही है कि जर्मनी ने यह मुकाबला बेहद एकतरफा अंदाज में जीता। लेकिन यह सच्चाई नहीं है। खेल के पहले 40 मिनटों तक फ्रांस इतिहास बनाती हुई दिखाई दे रही थी। जर्मनी का कोई कदम उनके हक में नहीं जा रहा था।
फ्रांस की टीम 2-1 की बढ़त पर थी। लेकिन यहां से जो पासा पलटा वह गोलों की झड़ी के बाद जर्मनी के विजेता बनने के बाद ही रुका। जर्मनी ने दिखाया उन्हें यूं ही चैंपियन नहीं कहा जाता। खेल की शुरुआत बेहद तेज अंदाज में हुई और दूसरे मिनट में ही निकलस वेलेन ने गोल कर जर्मनी को बढ़त दिलाई।
लेकिन यहां से फ्रांस ने जबरदस्त पलटवार किया। 16वें मिनट में पीटर वान स्टारटेन ने डी के टॉप पर खड़े गेस्पर्ड बूम गार्डन को पास दिया जिन्होंने वहीं से पहले प्रयास में ही जोरदार हिट लगाकर फ्रांस को बराबरी दिला दी। इस पूरे हाफ में फ्रांस की टीम हावी रही।
दूसरे हाफ में फ्रांस ने जर्मनी को भौंचक्का कर 2-1 की बढ़त ले ली। पहले ही पेनल्टी कॉर्नर ने बूम गार्डन ने यह गोल किया। लेकिन तीन मिनट बाद ही निकलस वेलेन ने गोल कर जर्मनी को 2-2 की बराबरी दिला दी। तीन मिनट बाद ही उन्होंने डी के अंदर रोहर के मिले पास को गोल में बदल जर्मनी को 3-2 की बढ़त दिला दी।
इसके बाद जोनास गोमोल ने 60वें और टूर्नामेंट के सर्वाधिक गोल करने वाले क्रिस्टोफर रोहर ने 67वें मिनट में गोल कर फ्रांस की कमर तोड़ दी। क्रिस्टोफर रोहर को उनके शानदार खेल के लिए ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया जबकि वेलेन ‘मैन ऑफ द मैच’ रहे।