1964 में पेरू में हुई दुर्घटना
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पेरू: 1964 जब गई थी 300 लोगों की जान
बात 24 मई 1964 की है। पेरू की राजधानी लिमा में पेरू और अर्जेंटीना के बीच ओलंपिक क्वॉलीफाइंग मैच चल रहा था। मैच के दौरान रेफरी के एक फैसले के बाद कम से कम दो फैन दौड़कर बीच मैदान पर पहुंच गए। मैदान में घुसने की कोशिश कर रहे प्रशंसकों पर पुलिस कार्रवाई से मैदान में मौजूद अन्य प्रशंसक नाराज हो गए और हिंसा भड़क उठी। घटना के वक्त मैदान में 53 हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। इस हिंसा में 300 से ज्यादा लोगों की जान गई। वहीं, 500 से ज्यादा लोग घायल हुए।
दरअसल, मैच के अंतिम क्षणों में पेरू की टीम को गोल करने की कोशिश को अस्वीकार कर दिया। इससे मैदान में मौजूद पेरू के समर्थक भड़क गए। प्रशंसकों ने मैदान पर धावा बोल दिया। पुलिस पर भी हमला किया गया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। इससे बहुत से प्रशंसक निकास द्वार के रास्ते में फंस गए। जो उस वक्त बंद था। ज्यादातर मौतें दम घुटने की वजह से हुई थीं।
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रूम में मैच के दौरान हुई हिंसा
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1982: रूम में मैच के दौरान हुई हिंसा में 66 लोगों की जान गई
ये घटना 20 अक्तूबर 1982 की है। नीदरलैंड की टीम हार्लेम और मॉस्को की स्पार्टक के बीच मैच चल रहा था। इस मैच के दौरान करीब 15 हजार प्रशंसक मैच देख रहे थे। मैच के दौरान हुई भगदड़ में क्या हुआ ये कई वर्षों तक पता तक नहीं चल सका। घटना के करीब सात साल बाद 1989 में सोवियत मीडिया की रिपोर्ट्स में सामने आया कि इस घटना में 66 लोगों की जान गई थी। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में मौतों का आंकड़ा 350 तक बताया गया था। शुरू में सोवियत मीडिया ने इस घटना के लिए डच टीम हार्लेम को इसके लिए दोषी बताया। हालांकि, बाद में ये बात सामने आई की पुलिस ने प्रशंसकों को स्टेडियम के एक कोने में एकत्र कर दिया था। एक ही जगह भीड़ बढ़ने से भगदड़ की शुरुआत हुई।
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1989 में हिल्सबरा स्टेडियम में हुई दुर्घटना
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