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Soccer Stadium Stampede: इंडोनेशिया से पहले भी हुए हैं दर्दनाक हादसे, 58 साल पहले हुई थी सबसे जानलेवा भगदड़

Mon, 03 Oct 2022 06:55 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता

सार

फुटबॉल मैच के दौरान सबसे जानलेवा भगदड़ 1964 में हुई थी। इस दुर्घटना में 300 लोग मारे गए थे। इसके अलावा 1986 में रूम में हुई दुर्घटना में 66 लोगों की मौत हो गई थी। यहां हम फुटबॉल मैदान की ऐसी ही दर्दनाक घटनाओं के बारे में बता रहे हैं...
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इंडोनेशिया में फुटबॉल मैच के दौरान मची भगदड़ का नजारा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इंडोनेशिया में फुटबॉल मैच के दौरान हुई भगदड़ में 125 लोग मारे गए। मैदान पर इस तरह की यह पहली घटना नहीं थी। फुटबॉल मैच के दौरान पहले भी कई हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। अब तक की सबसे जानलेवा घटना 1964 में पेरू में हुई थी। जब फुटबॉल मैच के दौरान हुई हिंसा में 300 प्रशंसक मारे गए थे। 
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आइये जानते हैं पहले कब-कब हिंसक घटनाएं हुई हैं? किस घटना में कितने लोगों की मौत हुई? इंडोनेशिया में हुई हिंसा में क्या हुआ? 
 
सबसे पहले जानें- इंडोनेशिया में क्या हुआ?
इंडोनेशिया के पूर्वी जावा स्थित मलंग रीजेंसी के कंजुरुहान स्टेडियम में ये घटना हुई। घटना के वक्त अरेमा एफसी और पर्सेबाया सुरबाया के बीच मैच चल रहा था। मैच में अरेमा एफसी की टीम को हार मिली। अपनी टीम को हारता देख बड़ी संख्या में प्रशंसक मैदान की तरफ भागने लगे। इस दौरान कुछ लोगों ने खिलाड़ियों पर हमला कर दिया। पुलिस ने लोगों को काबू करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इससे हुई भगदड़ में 125 लोगों की जान चली गई। घटना के वक्त स्टेडियम में करीब 42 हजार लोग मौजूद थे। 

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1964 में पेरू में हुई दुर्घटना - फोटो : सोशल मीडिया
पेरू: 1964 जब गई थी 300 लोगों की जान
बात 24 मई 1964 की है। पेरू की राजधानी लिमा में पेरू और अर्जेंटीना के बीच ओलंपिक क्वॉलीफाइंग मैच चल रहा था। मैच के दौरान रेफरी के एक फैसले के बाद कम से कम दो फैन दौड़कर बीच मैदान पर पहुंच गए। मैदान में घुसने की कोशिश कर रहे प्रशंसकों पर पुलिस कार्रवाई से मैदान में मौजूद अन्य प्रशंसक नाराज हो गए और हिंसा भड़क उठी। घटना के वक्त मैदान में 53 हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। इस हिंसा में 300 से ज्यादा लोगों की जान गई। वहीं, 500 से ज्यादा लोग घायल हुए।   

दरअसल, मैच के अंतिम क्षणों में पेरू की टीम को गोल करने की कोशिश को अस्वीकार कर दिया। इससे मैदान में मौजूद पेरू के समर्थक भड़क गए। प्रशंसकों ने मैदान पर धावा बोल दिया। पुलिस पर भी हमला किया गया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। इससे बहुत से प्रशंसक निकास द्वार के रास्ते में फंस गए। जो उस वक्त बंद था। ज्यादातर मौतें दम घुटने की वजह से हुई थीं।    

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रूम में मैच के दौरान हुई हिंसा - फोटो : सोशल मीडिया
1982: रूम में मैच के दौरान हुई हिंसा में 66 लोगों की जान गई
ये घटना 20 अक्तूबर 1982 की है। नीदरलैंड की टीम हार्लेम और मॉस्को की स्पार्टक के बीच मैच चल रहा था। इस मैच के दौरान करीब 15 हजार प्रशंसक मैच देख रहे थे। मैच के दौरान हुई भगदड़ में क्या हुआ ये कई वर्षों तक पता तक नहीं चल सका। घटना के करीब सात साल बाद 1989 में सोवियत मीडिया की रिपोर्ट्स में सामने आया कि इस घटना में 66 लोगों की जान गई थी। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में मौतों का आंकड़ा 350 तक बताया गया था। शुरू में सोवियत मीडिया ने इस घटना के लिए डच टीम हार्लेम को इसके लिए दोषी बताया। हालांकि, बाद में ये बात सामने आई की पुलिस ने प्रशंसकों को स्टेडियम के एक कोने में एकत्र कर दिया था। एक ही जगह भीड़ बढ़ने से भगदड़ की शुरुआत हुई।  

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1989 में हिल्सबरा स्टेडियम में हुई दुर्घटना - फोटो : सोशल मीडिया
1989: FA कप के सेमीफाइल में मची भगदड़ में गई 97 लोगों की जान
15 अप्रैल 1989 की बात है। FA कप का सेमीफाइनल मुकाबला लीवरपूल और नॉटिंघम फॉरेस्ट एफसी के बीच हो रहा था। शेफील्ड के हिल्सबरा स्टेडियम में ये मुकाबला चल रहा था। मैच के दौरान हुई घटना में 97 फुलबॉल प्रशंसकों की मौत हुई। शुरू में इस घटना के लिए लीवरपूल के प्रशंसकों को जिम्मेदार माना गया। हालांकि, 2016 में आई जांच रिपोर्ट में ये पता चला कि पुलिस की गलती की वजह से हिल्सबरा स्टेडियम में घटना हुई थी। 1989 में हुई इस घटना के बाद से ही मैचों के दौरान सुरक्षा सुधारों की शुरुआत हुई।
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