केन फुटबॉल विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले इंग्लैंड के दूसरे खिलाड़ी बने। इससे पहले 1986 में मैक्सिको में हुए विश्व कप में गैरी लिनाकर ने गोल्डन बूट जीता था। लिनाकर ने भी छह गोल किए थे।
फ्रांस के युवा खिलाड़ी किलियन मबापे, एंटोनी ग्रीजमैन (फ्रांस), रोमेलु लूकाकु (बेल्जियम), डेनिस चेरीशेव (रूस) और पुर्तगाल के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो चार गोल के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे।
गोल्डन बॉल का खिताब टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को मिलता है। इस होड़ में क्रोएशिया के कप्तान लुका मॉड्रिक, फ्रांस के कायलिन मबापे, बेल्जियम के केविन डि ब्रूइन और इडेन हेजार्ड थे। आखिरकार क्रोएशिया के लुका मॉड्रिक को यह खिताब मिला।
मॉड्रिक ने टूर्नामेंट के सात मैचों में तीन गोल किए। 1994 के बाद से कभी भी विश्व विजेता बनने वाली टीम के खिलाड़ी ने इस खिताब पर कब्जा नहीं जमाया है। 1994 में ब्राजील के रोमारियो ने यह उपलब्धि हासिल की थी।
विश्व कप में गोलकीपरों को शानदार प्रदर्शन के लिए गोल्डन ग्लव्स का अवॉर्ड दिया जाता है। इस बार गोल्डन ग्लव्स की रेस में बेल्जियम के थिबॉट कुर्टियोस, इंग्लैंड के जॉर्डन पिकफोर्ड, मैक्सिको के गुलेरमो ओछुआ, क्रोएशिया के डेनेजिल सुबासिच और फ्रांस के ह्यूगो लॉरिस थे।
इस विश्व कप में सबसे ज्यादा 27 बचाव के साथ बेल्जियम के गोलकीपर थिबॉट कुर्टियोस को शानदार गोलकीपिंग के लिए गोल्डन ग्लव्स का पुरस्कार दिया गया।
यहां बताना जरूरी हो जाता है कि बेल्जियम ने मौजूदा विश्व कप में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था। यहां हार मिलने के बाद इंग्लैंड को मात देते हुए उसे तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।