उस दौरान पूरे इलाके में फैली सांप्रदायिक हिंसा की वजह से टीम के उनके एक अन्य साथी वेद्रन कोर्लुका (टीम के सबसे प्रसिद्ध खिलाड़ियों में से एक) को भी क्रोएशिया में एक शरणार्थी के रूप में रहने के लिए मजबूर किया गया था।
कई अन्य लोगों को देश छोड़ना पड़ गया, जैसा कि इवान राकिटिच के मामले में हुआ, वो अपने परिवार के साथ स्विट्जरलैंड में जाकर बस गए थे। क्रोएशिया के लिए खेलने से पहले बार्सिलोना के यह स्टार फुटबॉलर स्विटजरलैंड के लिए कई जूनियर कैटेगरी में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
द प्लेयर ट्रिब्यून में छपे एक लेख में मोड्रिक ने लिखा, 'बाल्कन में क्या हो रहा है, बचपन में ये समझना मुश्किल था।' उन्होंने स्वीकार किया, 'मेरे माता-पिता ने कभी मुझसे या मेरे भाई से युद्ध के बारे में बातें नहीं की क्योंकि इसमें उन्होंने अपने बहुत से चाहने वालों को खो दिया था। हालांकि, हम भाग्यशाली रहे।'
अपने बचपन के दौरान विस्थापित एक और खिलाड़ी मारियो मांद्ज़ुकित्श हैं, जिनके निर्णायक गोल की बदौलत इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में क्रोएशिया को जीत मिली। वो जर्मनी में अपने परिवार के साथ बड़े हुए हैं।
लेकिन मोड्रिक को अपने देश में ही रहना पड़ा, हालांकि सच्चाई यह है कि भले ही प्रतिद्वंद्वी के रूप में उन्हें बारूदी सुरंगों का सामना नहीं करना पड़ा लेकिन सर्बियाई सेना की बमबारी खत्म होने के बाद उन्हें जेडार की सड़कों पर खेलना पड़ा।
मोड्रिक जैसे बच्चों को यह चेतावनी भी दी गई थी कि वो खतरनाक इलाकों में पहुंच जाने के जोखिम के कारण शरणार्थी कैंपों से बहुत दूर न जाएं। 2008 में मोड्रिक ने युद्ध के बारे में कहा था, 'मैं केवल छह साल का था और तब वास्तव में बहुत कठिन समय था। मुझे अच्छी तरह याद है लेकिन इसके बारे में आप सोचना भी नहीं चाहते।
उन्होंने कहा, 'युद्ध ने मुझे मजबूत बना दिया, मैं न तो इसे याद रखना चाहता हूं और न ही इसे भूलना चाहता हूं।'
कुछ इसी तरह की यादें डिफेंडर डेजान लोवरेन की भी हैं। युद्ध की वजह से उनके परिवार को भी विस्थापित होकर जर्मनी जाना पड़ गया, लेकिन वहां वो शरणार्थी नहीं बन सके और 1990 के दशक में क्रोएशिया लौटने के लिए मजबूर हो गए। लोवरेन आंशिक रूप से अपनी मातृभाषा भूल गए थे जिसकी वजह से उन्हें स्कूल में समस्याओं का सामना करना पड़ा।
'जब मैं सीरिया और अन्य देशों के शरणार्थियों को देखता हूं, तो मेरी पहला प्रतिक्रिया होती है कि हमें इन लोगों को मौका देना चाहिए। किसी दूसरे की वजह से शुरू हुए युद्ध का वो हिस्सा नहीं बनना चाहते, इसलिए वो वहां से भाग जाते हैं।' हालांकि, क्रोएशिया के सभी लोगों का ऐसा नहीं मानना है।
फरवरी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कुछ पुलिस हिंसा के मामलों का हवाला देते हुए क्रोएशियाई सरकार पर देश में अवैध रूप से आए अप्रवासियों को प्रभावी तरीके से शरण की पेशकश नहीं देने का आरोप लगाया।
करीब 41 लाख की आबादी वाला क्रोएशिया 1950 में ब्राजील को हराने वाले उरुग्वे के बाद वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने वाला सबसे छोटा देश है।
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल के दिन जुटरंजी अखबार ने एक संपादकीय प्रकाशित किया जिसमें खिलाड़ियों से खून, पसीने और एकता के साथ लड़ने के लिए लिखा गया था। इसमें लिखा गया, 'अगर मिलकर एक साथ काम करें तो छोटे देश भी बड़ा काम कर सकते हैं।'
खुद देश की राष्ट्रपति कोलिंदा ग्रैबर किटारोविक उस भूमिका को निभा रही हैं। क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान राष्ट्रीय टीम की जर्सी में वो प्रोटोकॉल तोड़ कर रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के सामने क्रोएशिया के गोल पर जश्न मनाती हुई दिखीं।
मैदान पर अपने शानदार फ़ुटबॉल प्रदर्शन की बदौलत क्रोएशिया सुर्खियां बटोर रहा है। इसके पीछे एक उनकी स्टाइल है तो दूसरा मैच दर मैच दिखता उनका सामूहिक प्रयास है।
वो लगातार तीन मुकाबलों में 120 मिनट का मैच खेल चुके हैं, इनमें से दो मैच पेनल्टी शूटआउट में भी गया। उम्मीदें जताई जा रही हैं कि रविवार को फाइनल में एक बार फिर वो अपने इसी प्रदर्शन को दोहराएंगे।
ये कुछ वैसा ही प्रश्न है जो इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले भी उठे थे। इंग्लैंड के खिलाफ मैच के बाद ब्रिटिश टेलीविजन आईटीवी पर मोड्रिक की प्रतिक्रिया थी, 'अंग्रेजी पत्रकारों और टीवी पर एक्सपर्ट रखने वालों ने हमें कमतर करके आंका था। यह उनकी एक बड़ी गलती थी, हमने उनकी लिखी सभी बातों को सुना और पढ़ा और हमने कहा, चलो देखते हैं कि कौन थक जाएगा? हमने एक बार फिर दिखा दिया कि हम थके नहीं हैं, इस मुकाबले में शारीरिक और मानसिक तौर पर हमारा दबदबा देखने को मिला।'
कप्तान को पता है कि क्रोएशिया ने फाइनल में अपनी जगह बना ली है। इसके साथ ही रियल मैड्रिड के मिडफील्डर मोड्रिक ने चेहरे पर एक मुस्कुराहट के साथ इंटरव्यू को अलविदा कहा।
32 वर्षीय लुका मोद्रिच ने अपने करियर के इस मुकाम पर पहुंचने के लिए कई चुनौतियों का सामना किया है. 9 सितंबर 1985 को जन्में मोद्रिच जब 10 साल के थे तो कई कोच ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वो बेहद कमजोर और शर्मीले हैं लिहाजा फुटबॉल नहीं खेल सकते.
हालांकि एक एक पुराने कोच ने उन्हें डायनामो जेग्रेब क्लब का ट्रायल दिलवाया. 16 साल की उम्र में मोद्रिच ने डायनेमो के साथ अनुबंध हुआ. यहां उनकी प्रतिभा में निखार आया और फिर वो क्लब और देश के लिए खेलने लगे.
2006 में मोड्रिक ने अर्जेंटीना का खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। वर्ल्ड कप सेमीफाइनल तक मोड्रिक अपने देश के लिए 112 मैच खेल चुके हैं। वो इंग्लैंड में फुटबॉल क्लब टॉन्टम (2008-12) से भी खेल चुके हैं और फिलहाल 2012 से स्पैनिश क्लब रियाल मैड्रिड के लिए खेल रहे हैं।
मोड्रिक दुनिया के सबसे कीमती फुटबॉलर्स में से एक हैं और छह बार क्रोएशियाई फुटबॉलर ऑफ द ईयर चुने जा चुके हैं। वो ऐसे एकमात्र क्रोएशियाई फुटबॉलर भी हैं जिन्हें फीफा वर्ल्ड XI की टीम में शामिल किया गया है।