कतर में इस साल के अंत में फुटबॉल वर्ल्ड कप का आयोजन होना है। जब से कतर को इसकी मेजबानी मिली है, तब से कोई न कोई विवाद सामने आ ही रहा है। यहां तक कि इस टूर्नामेंट का विरोध कई देशों में हुआ है। जर्मनी को स्टार खिलाड़ी टोनी क्रूज, जोशुआ किमिच और लियोन गोरेत्ज्गा के साथ-साथ डेनमार्क के पूर्व खिलाड़ी विलियम क्विस्ट और फ्रांस के दिग्गज फुटबॉलर थिएरी हेनरी कतर में वर्ल्ड कप का विरोध कर चुके हैं। अब इसमें डेनमार्क की फुटबॉल टीम भी शामिल हो गई है।
डेनमार्क की टीम अपनी जर्सी के जरिए टूर्नामेंट का विरोध करेगी। किट बनाने वाले कंपनी हूमेल ने विरोध जताने के लिए जर्सी और लोगो का रंग हल्का कर दिया है। उनसे कतर में वर्ल्ड कप की तैयारियों के लिए हुए मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ ऐसा किया है। हूमेल ने इंस्टाग्राम पर जर्सी को रिलीज करते हुए लिखा, ''डेनमार्क राष्ट्रीय टीम की नई जर्सी के साथ हम दोहरा संदेश भेजना चाहते थे। जर्सी न केवल यूरो 92 से प्रेरित हैं, बल्कि कतर और उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड के खिलाफ भी विरोध करते हैं।''
1992 में यूरो कप जीता था डेनमार्क
1992 में आयोजित यूरो कप में डेनमार्क की टीम चैंपियन बनी थी। उसने फाइनल में जर्मनी को हराया था। वहीं, कतर में मुश्किल परिस्थितियों में काम करने के कारण कई मजदूरों की जान गई और कुछ घायल हुए। हूमेल ने प्रवासी कामगारों की मौत और घायल होने के साथ-साथ काम करने की मुश्किल परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा, "हम एक टूर्नामेंट के दौरान दिखाई नहीं देना चाहते हैं, जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई है।"
हूमेल ने आगे कहा, ''"हम हर तरह से डेनिश राष्ट्रीय टीम का समर्थन करते हैं, लेकिन यह एक मेजबान राष्ट्र के रूप में कतर का समर्थन करने जैसा नहीं है।" हूमेल ने डेनमार्क की पारंपरिक लाल जर्सी के अलावा एक ग्रे और काले रंग की जर्सी भी जारी की। इसमें लोगो ठीक से दिखाई नहीं दे रहा।
कतर को पिछले दशक में शुरू की गई विशाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में श्रम अधिकारों पर अपने रिकॉर्ड को लेकर व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा है। हालांकि, कतर का कहना है कि आलोचना अनुचित है और बड़े सुधारों ने सैकड़ों हजारों प्रवासी श्रमिकों के लिए स्थितियां बदली हैं।