ड्रग्स तस्करों के साथ मुक्केबाज विजेंदर सिंह का नाम उछलने से एक बार फिर खिलाड़ियों और ड्रग तस्करों के बीच सांठगांठ का खुलासा हुआ है। हालांकि विजेंदर ने ड्रग तस्करों के साथ किसी संबंध से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी खिलाड़ी द्वारा ड्रग सेवन का मामला सामने आया हो। पहले भी कई खिलाड़ी इस कुचक्र में फंसकर अपनी जिंदगी तबाह कर चुके हैं।
जगदीश भोला
पहलवान जगदीश सिंह उर्फ भोला वह नाम है जिसने कभी देश के लिए एशियाई खेलों व एशियाई चैंपियनशिप जैसे आयोजनों में पदक जीते। उसकी इन्हीं सेवाओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उसे अर्जुन अवार्ड जैसे पुरस्कार से सम्मानित किया।
लेकिन ड्रग्स की तस्करी में पड़कर न सिर्फ उसे पंजाब पुलिस से डीएसपी जैसे पद से बर्खास्त किया गया बल्कि खेल मंत्रालय ने अर्जुन अवार्ड पुरस्कार भी छीन लिया।
राहुल शर्मा
उभरते क्रिकेटर और आईपीएल में पुणे वारियर्स की ओर से खेलने वाले राहुल शर्मा पर भी रेव पार्टी में ड्रग्स लेने का आरोप लगा। बाद में उनका टेस्ट पॉजीटिव पाया गया। ड्रग टेस्ट के नतीजे आने के बाद उनके क्रिकेट करियर पर सवालिया निशान लग गया।
श्रीलंका के खिलाफ एक मैच खेलने के बाद राहुल शर्मा गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं। इसी रेव पार्टी में दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटर पार्नेल भी शामिल हुए थे जिनका ड्रग टेस्ट पॉजीटिव पाया गया।
मनिंदर सिंह
पूर्व क्रिकेटर मनिंदर सिंह भी ड्रग्स लेने के आरोप में पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं। दिल्ली पुलिस की नारकोटिक्स ब्रांच ने मनिंदर को पूर्वी दिल्ली स्थित प्रीत विहार उनके घर से डेढ़ ग्राम कोकीन के साथ गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में उनको इस मामले में जमानत मिल गई थी।
मनिंदर सिंह बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज रहे हैं। भारत की ओर से खेलते हुए उन्होंने 35 टेस्ट मैच खेले जिसमें उन्होंने 88 विकेट लिए। इसके अलावा 59 वनडे मैच में उन्होंने 66 विकेट लिए।
शरत कुमार
भारतीय पैरालंपिक टीम के सदस्य और हाई जंपर शरत कुमार भी प्रतिबंधित दवाओं के घेरे में आ चुके हैं। शरत कुमार को प्रतिबंधित स्टेरॉयड लेने का दोषी पाया गया था। उनके कोच का कहना था कि शरत कुमार ने अपनी विकलांगता की वजह से दर्दनाशक दवाएं ली होंगी।
मोहम्मद आसिफ
पाकिस्तान के तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ को दुबई एयरपोर्ट पर प्रतिबंधित स्टेरॉइड नैंड्रोलीन रखने के आरोप में गिरफ्तार हुए थे। आसिफ ने अपनी सफाई दी कि यह दवा हकीम द्वारा दी गई शिलाजीत है।
वहीं डॉक्टरों का कहना था कि यह दवा नई मसल्स बनाने और पुरानी मसल्स की मरम्मत करने में उपयोगी है। इस दवा लेने के बाद गेंदबाज तेज गति से बॉलिंग कर सकता है। कई कानूनी दांवपेंच में उलझने के बाद आसिफ का क्रिकेट करियर लगभग खत्म हो गया।
और खिलाड़ी भी आ चुके हैं गिरफ्त में
वेस्टइंडीज के आंद्रे नील, दक्षिण अफ्रीका के हर्शल गिब्स, ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न सहित ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के दोषी पाए जा चुके हैं।
यहां तक 2003 क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल शुरू होने से पहले शेर्न वार्न एक ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए जिसके बाद उन्हें तुरंत घर भेज दिया गया। 1986 में इंग्लैंड के इयान बॉथम को कैनबीज का सेवन करने के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।
ड्रग्स क्यों लेते हैं खिलाड़ी?
नैतिकता ताक पर रखकर खिलाड़ियों द्वारा ड्रग लेना एक आदत बन चुकी है। खेल में अथाह धन और शोहरत ने खिलाड़ियों पर दबाव बना दिया है कि वे लगातार बेहतर प्रदर्शन करें।
विशेषकर एथलेटिक्स, साइक्लिंग, टेनिस, फुटबॉल जैसे खेल जिसमें शारीरिक ऊर्जा की बहुत खपत होती है। ऐसे खेलों के खिलाड़ी अपनी इनर्जी लेवल बरकरार रखने के लिए प्रतिबंधित ड्रग्स का सेवन लेते रहे हैं।
खेल विश्लेषकों के मुताबिक कुछ खेल कैंपों में तो प्रतिबंधित दवा का सेवन हिस्सा बन चुका है। खिलाड़ियों को नोट्स के जरिये बताया जाता है कि वे इस तरह की दवाएं कब और कैसे लें।