कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली मुक्केबाज प्रीति पवार ने बताया कि किसी भी मुक्केबाज के लिए मुकाबले से पहले वजन नियंत्रित रखना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर वजन घटाना, फिर शरीर को दोबारा हाइड्रेट करना और उचित पोषण लेना प्रदर्शन को प्रभावित होने से बचाने के लिए बेहद जरूरी होता है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस को दिए विशेष इंटरव्यू में प्रीति ने अपने गोल्ड मेडल, वजन नियंत्रित करने की प्रक्रिया, एशियन गेम्स की तैयारी और अपने पसंदीदा शौक क्विलिंग के बारे में खुलकर बात की।
गोल्ड जीतने पर परिवार ने जताया गर्व
प्रीति ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका पूरा परिवार बेहद खुश था। उन्होंने कहा, 'घरवालों का रिएक्शन बहुत अच्छा था। मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती। वे इस बात पर गर्व महसूस कर रहे हैं कि मैंने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता।'
मुकाबले से पहले 1.5 किलो तक वजन घटाती हैं
प्रीति ने बताया कि हर मुक्केबाज के लिए वजन कम करने की प्रक्रिया अलग होती है। कुछ खिलाड़ियों को इसमें ज्यादा परेशानी होती है, जबकि कुछ आसानी से वजन नियंत्रित कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि वह मुकाबले से पहले करीब 1 से 1.5 किलोग्राम तक वजन कम करती हैं।
प्रीति के मुताबिक, अंतिम समय में खानपान पर सबसे ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। वजन कम करने के बाद वह कुछ समय तक कुछ नहीं खातीं और वेट-इन पूरा होने के बाद शरीर में पानी और जरूरी पोषण की कमी पूरी करती हैं। उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहता है कि वजन घटाने का असर प्रदर्शन पर बिल्कुल न पड़े।
वजन मापने के बाद रिकवरी सबसे अहम
प्रीति ने बताया कि वजन मापने और मुकाबले के बीच आमतौर पर कम से कम तीन घंटे का समय मिलता है। इसी दौरान खिलाड़ी को खुद को पूरी तरह तैयार करना होता है। उन्होंने बताया कि वह मुकाबले से एक दिन पहले ही पूरा प्लान बना लेती हैं। सुबह निर्धारित समय तक वजन कम करने के बाद सबसे पहले शरीर को दोबारा हाइड्रेट करती हैं, फिर सही पोषण लेती हैं। अगर समय मिलता है तो थोड़ी देर आराम भी करती हैं। उन्होंने कहा कि मुकाबले से पहले वह विजुअलाइजेशन (कल्पना) भी करती हैं, जिससे मानसिक रूप से खुद को तैयार करने में मदद मिलती है।
एशियन गेम्स में कड़ी चुनौती की उम्मीद
प्रीति ने कहा कि आगामी एशियन गेम्स आसान नहीं होंगे क्योंकि एशिया में कई मजबूत मुक्केबाजी देश हैं। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि पिछले साल एशियन चैंपियनशिप में मिला स्वर्ण पदक उनके लिए बड़ा अनुभव साबित होगा। उनका मानना है कि एशियन गेम्स में भी अधिकांश मुकाबले उन्हीं प्रतिद्वंद्वियों से होंगे जिनका सामना वह पहले कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि अब कोचिंग स्टाफ के साथ मिलकर कमजोर पहलुओं पर काम किया जाएगा और ट्रेनिंग कैंप में एशियन गेम्स की रणनीति तैयार की जाएगी।
क्विलिंग और कैलीग्राफी से दूर करती हैं दबाव
रिंग के बाहर प्रीति की पहचान एक क्रिएटिव आर्टिस्ट के रूप में भी है। उन्होंने बताया कि खाली समय में उन्हें क्विलिंग और कैलीग्राफी करना बेहद पसंद है। कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले बेलफास्ट ट्रेनिंग कैंप के दौरान उन्होंने एथलीट तेजस्विन शंकर के लिए क्विलिंग से एक पोस्टर बनाया था, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर भी साझा किया था। प्रीति ने कहा कि वह अपने कई साथियों के लिए भी ऐसे पोस्टर बना चुकी हैं। उनके मुताबिक, यह शौक उन्हें खेल के दबाव से कुछ समय के लिए दूर ले जाता है और ओवरथिंकिंग से बचाने में मदद करता है।