अनुभवी भारोत्तोलक पूनम यादव महिला भारोत्तोलन के 76 किलो भारवर्ग में क्लीन एंड जर्क के अपने तीनों प्रयासों में विफल रहने के बाद अंतिम स्थान पर रहीं। पिछली बार गोल्ड कोस्ट में 69 किलो भारवर्ग में चैंपियन रहीं पूनम स्नैच में 98 किलो वजन उठाकर दूसरे स्थान पर चल रही थीं। पहले प्रयास में वह 95 किलो उठाने में असफल रही थीं लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने यही वजन उठा लिया। तीसरे प्रयास में वह 98 किलो उठाने में सफल रहीं। उस समय उनसे आगे कनाडा की माया लेलर थी जिन्होंने 100 किलो उठाया था।
क्लीन एंड जर्क वाराणसी की पूनम के लिए बेहद निराशाजनक रहा। वह तीनों प्रयासों में 116 वजन उठाने में विफल रहीं। पूनम ने जजों के निर्णय को चुनौती दी लेकिन इसे खारिज कर दिया गया।
माया का रिकॉर्ड प्रदर्शन
कनाडा की माया लेलर ने 228 (100+128) वजन उठाकर खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया। नाइजीरिया की तैवो लियाडी 216(96+120) को रजत और नारू की मैक्सिमा 215(96+119) को कांस्य पदक मिला।
चोट के बावजूद खेलीं पूनम : फेडरेशन
भारतीय भारोत्तोलन संघ (आईडब्ल्यूएलएफ) के अध्यक्ष सहदेव यादव ने दावा किया है कि पूनम यादव पूरी तरह फिट न होने के बावजूद खेलने उतरीं। सहदेव ने कहा कि एक मेडल हाथ से निकल गया। उनके घुटने में चोट थी, इस वजह से हमने उनका नाम पहले रोक लिया था लेकिन पूनम ने कहा कि वह फिट हैं और एक डॉक्टर का फिटनेस सर्टिफिकेट भी हमें दिखाया। ऐसे में हम उन्हें रोक नहीं सकते थे। यदि आप उनकी लिफ्ट को गौर से देखें तो साफ पता चलता है कि वह अपना श्रेष्ठ नहीं कर पा रही थी। वह 100 प्रतिशत फिट नहीं थी। हमने एक पदक गंवा दिया था।
पूरी तरह फिट थी, भाग्य साथ नहीं था : पूनम
जब इस बारे में पूनम से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हां जी, हां जी, मैं पूरी तरह फिट थी। चोट तो लिफ्टर की जिंदगी का हिस्सा है। मेरा दुर्भाग्य है कि ऐसा हो गया। विफल हुई लिफ्ट के बारे में उन्हाेंने कहा कि मैंने एक जज को देखा, वो मुस्करा रहे थे और ऐसे में मैंने थ्रो कर दिया, लाइट की तरफ नहीं देखा।