तुर्किये की राबिया के दिलो-दिमाग में वह काली बर्फीली रात पूरी तरह घर कर चुकी है। मालात्या शहर स्थित उनके घर का कमरा हिला तो वह कुछ ही सेकंड में बाहर निकल आईं। उनके पैर में जूते भी नहीं थे और बाहर कड़ाके की सर्दी के साथ बर्फ पड़ रही थी। चारों ओर चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। राबियां बताती हैं कि उन्होंने और उनके परिवार ने किसी तरह जान तो बचा ली, लेकिन हालात मौत से भी बदतर थे। 10 दिन तक उन्हें कार में सोना पड़ा। तब जाकर उन्हें रहने के लिए टेंट नसीब हुआ। अभी भी वह और उनका परिवार टेंट में रह रहे हैं। वह टेंट में ही रहकर यहां खेलने पहुंची हैं। वह अपने देश के लिए यहां पदक जीतना चाहती हैं। उन्हें उनके देश का झंडा प्रेरणा देता है।
राबिया को उम्मीद जल्द मिलेगा उन्हें अपना घर
राबिया विश्व चैंपियनशिप में 50 भार वर्ग में खेल रही हैं। उन्हें विश्व चैंपियनशिप के लिए सिर्फ 10 दिन तैयारियों का मौका मिला है। राबिया कहती हैं कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें अपना घर मिल जाएगा। टेंट में कठिन परिस्थितियों में रहने के बावजूद वह अपने को इस चैंपियनशिप में खेलने से नहीं रोक पाई हैं। हालांकि ऐसी स्थितियों में खेलना काफी कठिन है। वह इस टूर्नामेंट के बाद एक बार फिर अपनी तैयारियां शुरू करेंगी।