ओडिशा के पैरा शटलर प्रमोद भगत ने शनिवार को टोक्यो पैरालंपिक में पुरुष एकल एसएल3 फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के डेनियल बाथेल को 2-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम करके इतिहास रच दिया। बैडमिंटन में ऐसा करने वाले प्रमोद भगत भारत के पहले बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए हैं।
प्रमोद भगत ने दो सीधे सेटों में बाथेल को 21-14, 21-17 से हराकर स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने पहला गेम 21 मिनट में और दूसरा 24 मिनट में जीता है। ओडिशा के बरगढ़ जिले के छोटे से गांव अट्टाबीरा के प्रमोद चार साल की उम्र में पोलियो से पीड़ित हो गए थे। प्रमोद के पांच भाई-बहन हैं जिनमें दो भाई और तीन बहनें हैं। उसने कुछ साल पहले अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था।
प्रमोद के छोटे भाई शेखर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, हम अपनी खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकते, हमारे भाई प्रमोद के स्वर्ण पदक जीतने के बाद हम कितने खुश हैं। उन्हें बैडमिंटन से प्यार था।कभी-कभी हमारे पिता उनके बैडमिंटन खेलने पर नाराज हो जाते थे, पिताजी कहते थे कि ज्यादातर समय खेलने के बजाय, अगर आप पढ़ाई में मन लगाते हैं, तो आपको अच्छी नौकरी मिल सकती है। अब वह देश के लिए सोना लेकर आए हैं।
जैसे ही प्रमोद के स्वर्ण पदक जीतने की खबर फैली, उनके परिवार के सदस्य, दोस्त और पड़ोसी भुवनेश्वर में उनके ईएसआईसी गवर्नमेंट क्वार्टर के बाहर जमा हो गए और जश्न मनाने लगे।
अट्टाबीरा में उनके गृहनगर में भी ऐसा ही दृश्य था। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पैरालंपिक खेलों में पैरा-बैडमिंटन पुरुष एकल एसएल3 में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले शटलर बनने के बाद प्रमोद को बधाई दी।
मैच से पहले प्रमोद ने लिखा था, कल भारतीय खेलों के लिए एक बड़ा दिन है और मैं चाहता हूं कि हम सभी एक साथ आएं। जब मैंने अपनी किशोरावस्था में रैकेट उठाया तो मेरा सपना था कि मैं इस स्तर पर खेलूं और अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में देश की सेवा करूं। मेरा उद्देश्य भारत को बैडमिंटन हब बनाना है। मैं आशा करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि मैं सफल हो जाऊं।