तो पैरालंपिक नहीं खेल पाते प्रमोद
लखनऊ में दिए गए पते पर नहीं मिलने के कारण बीडब्लूएफ ने उनका मिस टेस्ट करार दिया। कोच गौरव खन्ना के मुताबिक प्रमोद के लिए यह मुसीबत का वक्त था। उन्होंने बीडब्लूएफ से गुहार लगाई ऐसा नहीं करें, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नतीजा यह निकला कि प्रमोद पटना से वापस आने के बाद फिर लखनऊ नहीं छोड़ा और तैयारियों में जुट गए। अगर उनके दो और मिस टेस्ट घोषित कर दिए जाते तो फिर वह पैरालंपिक नहीं खेल सकते। लेकिन इस घटना से पूरी टीम ने सबक लिया और व्हेयर अबाउट के लिए दिए गए पते पर रहे।
मां की यादों को सहारा बना की तैयारी
प्रमोद के मुताबिक 2005 में उनकेपिता चले गए थे उसके बाद उनकी मां कुसुम देवी उनका सहारा बनीं। उस समय मां पटना में थीं। उनके पास सूचना आई कि वह बीमार हैं उनकी हालत गंभीर है। मां के पास सिर्फ एक भाई था। वह लखनऊ से तुरंत पटना चले गए। लेकिन मां नहीं बचीं। वह बुरी तरह टूटे हुए थे। लेकिन कोच ने काफी समझाया और मां की यादों के सहारे तैयारियों में जुट गए। यही कारण है कि वह यह स्वर्ण अपनी मां और पिता को समर्पित करते हैं। पिता ने उन्हें रैकेट दिलाने के लिए काफी त्याग किया।