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तब दस से तीस मिनट में हो सकती है 8 घंटे की नींद पूरी

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अर्जुन का एक नाम गुडाकेश भी है क्योंकि उन्होंने निद्रा पर विजय प्राप्त कर ली थी। यह संभव है सोने के एक खास तरीके से। इस तरीके का नाम है योगनिद्रा। इस विधि से 10 से तीस मिनट तक योगनिद्रा का अभ्यास करने पर सात से आठ घंटे की गहरी नींद के बराबर विश्राम प्राप्त होता है। बहुत से लाोग इसका अभ्यास भी करते हैं लेकिन इसका उन्हें लाभ नजर नहीं अाता।
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भावातीत ध्यान विज्ञान संस्थान ने इस विषय पर एक शोध किया है। इसमें तीन सौ अभ्यासियों के किए गए अध्ययन के अनुसार योगनिद्रा का अभ्यास शुरु करने वाले लोगों में पचासी प्रतिशत साधक एक सप्ताह बाद ही योगनिद्रा का अभ्यास छोड़ देते हैं।

सात प्रतिशत लोग तो चार दिन में ही ऊब जाते हैं। संस्थान के निदेशक डा. स्वामी सत्यशरण ने कहा है कि योगनिद्रा का लाभ उठाने के लिए कम से कम तीन सप्ताह का अभ्यास जरूरी है। भागदौड़ और तनाव से भरी आज की जीवनशैली में लोगों की नींद खो रही है।
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उस नींद को हासिल करने के लिए पहले उपचार में ट्रेंकुलाइजर और कुछ अरसे बाद उसके नाकाम होने के बाद योगनिद्रा के अभ्यास पर ही निगाहें टिकती है। संस्थान के अध्ययन का उद्देश्य यह था कि योगनिद्रा के प्रति लोगों का क्या रवैया है और इस बारे में वह क्या सोचते हैं?

तनाव से मुक्ति पाने के लिए योगनिद्रा काफी लोकप्रिय हो रही है। रूस, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में भावातीत केंद्र की शाखाओं में सैकड़ों लोगों ने योगनिद्रा की विधि सीखी है। निरंतरता की दृष्टि से वहां भी कोई अच्छी स्थिति नहीं है।

अर्थात लोग सप्ताह दस दिनों में थक जाते हैं और अभ्यास छोड़ देते है। स्वामी विवेकानंद की पुस्तक राजयोग का हवाला देते हुए स्वामी शरण ने कहा कि महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में स्पष्ट कहा है कि शांति और कैवल्य के लिए पहले बहिरंग जीवन को ठीक करना चाहिए।
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उनका कहना है कि आसन तक लंबे अभ्यास और संयमित सदाचारी हुए बिना सिद्ध नहीं होता, योगनिद्रा तो ध्यान,आसन और संयम का समन्वित अभ्यास है।
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