मौन एक ऐसा उपाय है, जिससे आंतरिक जगत के साथ बाहरी दुनिया में भी मदद मिलती है। मौन से मन की मृत्यु भी हो जाती है और वह शक्तिशाली भी बनता है।
जिन्हें मोक्ष के मार्ग पर जाना वे इस उपाय से वह मन को नष्ट कर सकते हैं और जो भरपूर जिंदगी जीना चाहते हैं वे मौन से मन की शक्ति बढ़ा सकते हैं।
तथाता बौद्ध मठ में मौन की शक्ति जानने के लिए किए प्रयोगों के दौरान करीब दो सौ लोगों को चुना गया। इनमें विद्यार्थी, साधक, कामकाजी, व्यवसायी और नौकरीपेशा सभी तरह के लोग थे।
पढ़ें, साप्ताहिक राशिफल 16 से 22 दिसंबर तक
उनसे कहा गया कि अपने काम करते समय चुप रहना है। चुने गए लोगों में मठ से बाहर रहने वाले लोग भी थे। इक्कीस दिन के इस अभ्यास के बाद नोटबुक में भागीदारों के लिखे जवाब और निरीक्षक साधकों की टिप्पणियों को मिला कर देखा गया।
निष्कर्ष निकला कि ध्यान दोनों तरह के काम में लगे लोगों के लिए लाभदायक हैं। योगसाधना में तो मौन का वैसे ही बहुत महत्व है। कामकाजी या लौकिक जीवन में मौन से सकारात्मक सोच का विकास होता है।
इस तरह की सोच आंतरिक या मानसिक शक्ति को और मजबूत करती है। लामा ने लिखा है कि काम करते हुए बीच बीच में सांसो के आने जाने पर ही ध्यान केंद्रित करना और जो भी दिखाई या सुनाई दे रहा है उसे बिना किसी प्रतिक्रिया के देखते रहें।